नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । एसएस राजामौली की ब्लॉकबस्टर फिल्मों ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ (2015) और ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ (2017) को अब एक नए सिनेमाई रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। जिसका शीर्षक है ‘बाहुबली: द एपिक’। यह रीमास्टर्ड संस्करण 31 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगा और दर्शकों को 3 घंटे 44 मिनट लंबा शानदार सिनेमाई अनुभव देगा। इस भव्य प्रस्तुति के पीछे हैं अन्नपूर्णा स्टूडियोज के CTO सीवी राव, जिन्होंने खुलासा किया कि दोनों फिल्मों को एक साथ रीमास्टर करने में करीब दो महीने का समय लगा। मीडिया बातचीत में उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने इसे “सिनेमा का सेलिब्रेशन” बताया है।
क्या बोले CTO सीवी राव ?
अन्नपूर्णा स्टूडियोज के CTO सीवी राव ने बताया कि ‘बाहुबली: द एपिक’ को केवल 10 हफ्तों में रीमास्टर करना किसी आसान काम से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि दो फिल्मों को एक में मिलाना और उन्हें नए अंदाज में प्रस्तुत करना चुनौतीपूर्ण था, खासकर जब पोस्ट-प्रोडक्शन वर्कफ्लो दस साल पहले आज जैसा नहीं था।
राव ने खुलासा किया कि “प्रोड्यूसर शोबू यारलागड्डा चाहते थे कि फिल्म बिल्कुल नई लगे। दोनों फिल्में मिलाकर पांच घंटे से ज़्यादा लंबी हैं। हमें जल्दी ही एहसास हुआ कि किसी नई फिल्म पर काम करना आसान है, क्योंकि पुरानी फिल्म को रीमास्टर करते समय सालों पहले वाले लुक को दोबारा पाना हमेशा आसान नहीं होता। यह न तो बेहतर है, न ही बुरा, यह बस अलग है, और व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। DI (Digital Intermediate) में फिल्म का मास्टर बनाने में हमें लगभग 9 हफ्ते लगे, जबकि नई फिल्म में केवल 4 हफ्ते में यही काम किया जा सकता है।”
द एपिक एक बिल्कुल नई फिल्म, साउंड और विजुअल्स में किए गए बदलाव
CTO सीवी राव का कहना है कि ‘बाहुबली: द एपिक’ अब एक कुल मिलाकर नई फिल्म होगी, क्योंकि इसके साउंड और विजुअल्स में पूरी तरह से बदलाव किया गया है। राव बताते हैं, “जब बाहुबली पहली बार आई थी, तो हर फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन में लगभग चार महीने लगते थे। इस बार पूरे प्रोजेक्ट को लगभग 10 हफ्ते (दो महीने) में पूरा किया गया। लेकिन हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी आउटपुट को कई फॉर्मेट में डिलीवर करना।” वे आगे बताते हैं कि “ओरिजिनल बाहुबली फिल्मों के विपरीत, बाहुबली: द एपिक अब IMAX, Dolby, Dbox, Pcx, 4DX, ICE इमर्सिव और Epic जैसे कई फॉर्मेट में उपलब्ध होगी। Dolby क्वालिटी प्राप्त करने में ही हमें दो हफ्ते लगे। इसके अलावा, फिल्म को 1.9, 1.85 और 2.39 जैसे विभिन्न एस्पेक्ट रेशियो में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसे हासिल करने में लगभग 10 दिन लगे।”
बाहुबली: द एपिक दर्शकों को देगा एक नया सिनेमाई अनुभव
राव का कहना है कि, बाहुबली फिल्मों को पहले भी दर्शकों ने बेहद पसंद किया, लेकिन अब ‘बाहुबली: द एपिक’ उन्हें एक अनूठा और नया अनुभव देने वाली है। राव कहते हैं “इसमें कोई शक नहीं कि यह देखने में बिल्कुल नया अनुभव होगा, क्योंकि हमने विजुअल इफेक्ट्स, कलर और डायनामिक्स में बड़े सुधार किए हैं। साउंड अब Dolby Atmos में उपलब्ध है। जो लोग विभिन्न फॉर्मेट पसंद करते हैं, उनके पास इसे देखने के और भी कारण होंगे। यही वजह है कि मुझे लगता है कि यह सिनेमा का एक असली सेलिब्रेशन होने वाला है।”
राजामौली की फिल्मों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका : सीवी राव
उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब एसएस राजामौली की फिल्में अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचें। वे वही व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत में Dolby Cinema टेक्नोलॉजी लाने में अहम योगदान दिया, हालांकि देश में पुणे के City Pride ही एकमात्र सिनेमा हॉल है जो इस क्वालिटी को प्रदर्शित कर सकता है। राव कहते हैं, “मुझे याद है कि RRR से पहले लास वेगास में एक Dolby Cinema थिएटर में A Quiet Place देखने के बाद मैं हैरान रह गया। मैंने Dolby और राजामौली दोनों को सलाह दी कि RRR इस फॉर्मेट के लिए बिल्कुल सही है। जब उन्होंने सहमति दी, यह एक बड़ी सफलता साबित हुई और भारत में नहीं तो विदेशों में यह पहली भारतीय फिल्म बनी जो इस फॉर्मेट में रिलीज हुई।”
RRR के बाद, अन्नपूर्णा स्टूडियोज ने Pushpa 2, Devara, Kantara Chapter 1, Baahubali: The Epic और War 2 जैसी फिल्मों के लिए भी Dolby Cinema फॉर्मेट डिलीवर करने में अहम भूमिका निभाई। राव आगे बताते हैं कि भारत में और अधिक Dolby Cinema-इनेबल्ड थिएटर खोलने की योजना भी है। राव ने स्टूडियो के आगामी प्रोजेक्ट्स पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि “हम महेश बाबू की SSMB 29, प्रभास की फौजी, राम चरण की पेड्डी और जूनियर NTR की ड्रैगन जैसी बड़ी फिल्मों पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में भी फिल्में बना रहे हैं। अब हमारा लक्ष्य इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स भी लाना है।”





