नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अनुराग कश्यप वो फिल्ममेकर हैं, जिनकी डार्क और दमदार कहानियां पर्दे पर आते ही झकझोर देती हैं। उनकी फिल्मों में सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक सच्चाइयों का कड़वा आईना भी नजर आता है। अनुराग ने अपने फिल्ममेकर के रुप में करियर की शुरुआत महज 18 साल की उम्र में की थी और आज दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुके हैं।
10 सितंबर 1972 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे अनुराग कश्यप ने अपनी कहानियों, दमदार किरदारों और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक नज़र के जरिए हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। आज वह देश के मशहूर फिल्मकारों में गिने जाते हैं और उनकी फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी शामिल है।
निर्देशन के साथ-साथ अनुराग कश्यप ने अभिनय में भी हाथ आज़माया है। हाल ही में वह नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत फिल्म हड्डी में नज़र आए, जहां उन्होंने एक क्रूर और निर्दयी खलनायक का दमदार किरदार निभाकर दर्शकों को चौंका दिया।
महज 18 साल की उम्र में शुरु किया राइटर का सफर
अनुराग कश्यप आज 52 साल के हो चुके हैं। करीब 26 साल लंबे करियर में उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन किया और हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी। महज़ 18 साल की उम्र में बतौर लेखक सफर शुरू करने वाले अनुराग कश्यप आज एक सफल और चर्चित फिल्म निर्माता के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
वैज्ञानिक बनने का था सपना
अनुराग कश्यप का सपना बचपन में वैज्ञानिक बनने का था, इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज में दाखिला भी लिया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था—वहां से उनकी राह मुड़ी और कदम पड़ गए चकाचौंध से भरी फिल्मी दुनिया में, जहां उन्होंने अपनी असली पहचान बनाई।
फिल्म ‘सत्या’ से मिली पहचान
साल 1998 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘सत्या’ से अनुराग कश्यप को जबरदस्त पहचान और नाम मिला। इस फिल्म की स्क्रिप्ट उन्होंने ही लिखी थी, जिसने उनके करियर को नई उड़ान दी। इसके बाद उन्होंने कई शानदार फिल्मों की कहानी लिखी और धीरे-धीरे निर्देशन की ओर भी कदम बढ़ाया। बतौर निर्देशक उनका डेब्यू पांच से हुआ, हालांकि यह फिल्म कभी रिलीज़ नहीं हो पाई। इस फिल्म में केके मैनन नजर आने वाले थे।
अनुराग कश्यप इस फिल्म से बने स्टार
अनुराग कश्यप के करियर में ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ एक मील का पत्थर साबित हुई, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित फिल्मकारों में शामिल कर दिया। उनकी हिट फिल्मों और सीरीज़ की लिस्ट भी बेहद खास है- ‘देव डी’, ‘गुलाल’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘बॉम्बे टॉकीज’, ‘अगली’, ‘रमन राघव 2.0’ और ‘मनमर्ज़िया’ आज भी दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं जितनी रिलीज़ के वक्त थीं।





