फिल्म ‘वाराणसी’ बना रहे राजामौली ने क्यों कहा बोले- बाहुबली को भी मैं और बेहतर बना सकता था

एस.एस. राजामौली अपनी अगली मेगा फिल्म वाराणसी के लिए भारत की सबसे एडवांस्ड मोशन कैप्चर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैंजिससे सिनेमाई अनुभव और भव्य होगा।

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Rajamouli, Varanasi
Rajamouli, Varanasi

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. एस. राजामौली एक बार फिर अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘वाराणसी’ को लेकर चर्चा में हैं। करीब 1300 करोड़ रुपये के बजट में बन रही यह मेगा एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल रिलीज के लिए तैयार की जा रही है और इसमें महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को लेकर देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्सुकता देखी जा रही है।

भारतीय सिनेमा के लिए गेमचेंजर

हैदराबाद के अन्नपूर्णा स्टूडियो में हाल ही में शुरू हुई अत्याधुनिक मोशन कैप्चर लैब में फिल्म के कई अहम सीक्वेंस शूट किए गए हैं। राजामौली का कहना है कि यह तकनीक भारतीय सिनेमा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। उनके मुताबिक पहले बड़े विजुअल और फैंटेसी दृश्यों के लिए विदेशी स्टूडियो पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब भारत में ही विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे कल्पना को और अधिक सटीकता और भव्यता के साथ पर्दे पर उतारा जा सकता है।

भारत में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही

इसी संदर्भ में राजामौली ने अपनी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर बाहुबली: द बिगिनिंग का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उस समय ऐसी एडवांस मोशन कैप्चर तकनीक भारत में होती, तो वे उस फिल्म को और बेहतर बना सकते थे। उनका मानना है कि भारत में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही, लेकिन टेक्नोलॉजी के अभाव में कई बार विजन को पूरी ऊंचाई तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

महेश बाबू के ‘रुद्र’, पृथ्वीराज के ‘कुंभ’

‘वाराणसी’ की पहली झलक पेरिस के मशहूर सिनेमा हॉलले ग्रैंड रेक्स में आयोजित एक ट्रेलर इवेंट में दिखाई गई, जहां दर्शकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया ने फिल्म के प्रति वैश्विक उत्साह को और बढ़ा दिया। सोशल मीडिया पर जारी किरदारों के पोस्टर्स महेश बाबू के ‘रुद्र’, पृथ्वीराज के ‘कुंभ’ और प्रियंका के ‘मंदाकिनी’ अवतार पहले ही चर्चा का विषय बन चुके हैं।

भारतीय सिनेमा का सबसे महत्वाकांक्षी निर्देशक

कुल मिलाकर, ‘वाराणसी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि तकनीक और कहानी कहने के नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। राजामौली का यह बयान कि वे ‘बाहुबली’ को और बेहतर बना सकते थे, इस बात का संकेत है कि वे हर प्रोजेक्ट के साथ खुद को और ऊंचा उठाने की कोशिश में हैं और शायद यही जुनून उन्हें भारतीय सिनेमा का सबसे महत्वाकांक्षी निर्देशक बनाता है।

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