नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के ‘एंग्री यंग मैन’ और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आज 11 अक्टूबर को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी कहानी संघर्ष, निरंतर प्रयास और हौसले की मिसाल है। जब कोई यह नहीं सोच पाता था कि वह चमकेगा, तब अमिताभ ने ठानी थी कि वह बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारे बनेंगे। उनके सफर की शुरुआत आसान नहीं थी, बल्कि 12 फिल्मों की लगातार असफलता ने उनके सामने कई मुश्किलें खड़ी कर दीं। लेकिन हार नहीं मानी, मेहनत और अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने साबित कर दिया कि असफलता जीत की सीढ़ी है।
शुरुआती दिन: संघर्ष और हौसला
अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हिंदी के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन के परिवार में हुआ था। उनकी मां तेजी बच्चन थिएटर से जुड़ी थीं, जिन्होंने बेटे को अभिनय की शुरुआती शिक्षा दी। हालांकि, एक्टिंग के क्षेत्र में कदम रखने के पहले अमिताभ ने कई नौकरी के रास्ते अपनाए। कोलकाता में रेडियो एंकर और शिपिंग कंपनी में एग्जीक्यूटिव के रूप में भी काम किया।
लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में उनकी शुरुआत कतई आसान नहीं थी। उनकी लंबी कद-काठी, भारी आवाज और सांवला रंग उन्हें शुरुआती दौर में कई बार रिजेक्ट करवा चुके थे। डेब्यू फिल्म ‘7 हिंदुस्तानी’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह फ्लॉप रही और इसके बाद 12 फिल्मों की लगातार असफलता ने लोगों के मन में यह धारणा बैठा दी कि अमिताभ बच्चन ‘फ्लॉप न्यूकमर’ हैं।
जंजीर ने बदली किस्मत
1973 में आई फिल्म ‘जंजीर’ ने अमिताभ के करियर को पूरी तरह से पलट कर रख दिया। ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि बनाने वाली यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई। जंजीर के बाद अमिताभ ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतना शुरू किया और ‘नमक हराम’, ‘अभिमान’, ‘चुपके-चुपके’, ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘सिलसिला’ जैसी कई हिट फिल्में दीं। उनका दमदार अभिनय और खासकर एक्शन सीन्स ने उन्हें ‘एंग्री यंग मैन’ का टैग दिलाया। इसके बाद ‘शहंशाह’ फिल्म में डबल रोल में अमिताभ ने अपनी versatility साबित की और वह ‘बॉलीवुड के शहंशाह’ कहलाए।
पढ़ाई और बचपन
अमिताभ बच्चन ने शेरवुड कॉलेज, नैनीताल से अपनी पढ़ाई की और स्नातक की डिग्री किरोरीमल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से हासिल की। फिल्मी दुनिया में आने से पहले उनके जीवन में अनेक संघर्ष थे। मुंबई आने के बाद आर्थिक तंगी के कारण कई बार उन्हें मरीन ड्राइव की बेंच पर रातें बितानी पड़ीं।
जया भादुड़ी से शादी और पारिवारिक जीवन
1973 में ‘जंजीर’ की सफलता के बाद अमिताभ बच्चन की जिंदगी में एक और खुशखबरी आई। उन्होंने जया भादुड़ी से शादी की, जो कि फिल्म ‘अभिमान’ के रिलीज़ होने से एक महीने पहले हुई थी। उनकी शादी का एक दिलचस्प किस्सा भी है कि विदेश यात्रा से पहले हरिवंश राय बच्चन ने कहा था कि अमिताभ और जया को शादी करनी होगी। दोनों के दो बच्चे हैंबेटी श्वेता बच्चन नंदा और बेटे अभिषेक बच्चन। अभिषेक ने अभिनेत्री ऐश्वर्या राय से शादी की है और उनकी बेटी आराध्या है।
अमिताभ बच्चन का राजनीति में कदम
1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ ने राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की और भारतीय राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ी।
‘एंग्री यंग मैन’ के 10 यादगार डायलॉग्स
अमिताभ बच्चन की फिल्मों के डायलॉग आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं। उनमें से कुछ खास हैं
“मर्द को दर्द नहीं होता।” मर्द
“मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता।” दीवार
“मुझे जो सही लगता है मैं करता हूँ, फिर चाहे वो भगवान के खिलाफ हो, कानून के खिलाफ हो या पूरे सिस्टम के खिलाफ।” सरकार
“तुम्हारा नाम क्या है… बसंती।” शोले
“डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।” डॉन
“रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं, मगर नाम है शहंशाह।” शहंशाह
“जब तक बैठने का ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो, ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं।” जंजीर
“हम भी वो हैं जो कभी किसी के पीछे खड़े नहीं होते, जहां खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं शुरू होती है।” कालिया
“मूछें हो तो नत्थूलाल जैसी, वरना ना हों।” शराबी
प्रेरणा से भरा सफर
अमिताभ बच्चन के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि सफलता कभी भी आसान नहीं होती, पर संघर्ष और लगन से हर मुश्किल आसान हो सकती है। 12 फिल्मों की निराशा के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और बॉलीवुड के महानायक बन कर इतिहास रच दिया।





