दुर्ग, 24 जून (हि.स.) । भूपेश सरकार के अड़ियल रुख का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। भूपेश सरकार द्वारा खराब हो चुके गोबर को छह रुपये किलो के हिसाब से किसानों को जबरदस्ती बेचने के फैसला अन्याय पूर्ण है। उपरोक्त वक्तव्य भरतीय जनता पार्टी विधायक दल के स्थाई सचिव जितेंद्र वर्मा ने गुरुवार को कही। जितेंद्र वर्मा ने कहा सरकार का यह फैसला अन्याय पूर्ण ही नहीं बल्कि किसानों के ऊपर दोहरे मापदंड वाला बेतुका फैसला है। गोधन न्याय योजना के तहत राज्य सरकार ने 44 लाख टन गोबर खरीदा और इसमें से केवल एक लाख टन से ही वर्मी कम्पोस्ट बनाया गया, बाकि 43 लाख टन गोबर गलत प्रबंधन और अव्यस्था के चलते खराब हो गया है। जिसके नुकसान की भरपाई भूपेश सरकार गरीब किसानों से करना चाहती है। किसानों के ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ का भार पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खराब गोबर को सामान्य गोबर खाद ऑर्गेनिक मेन्योर के नाम से किसानों को जबरदस्ती बेचे जाने की तैयारी राज्य सरकार द्वारा की जा रही है। गांव में किसानों द्वारा तैयार घुरवा खाद की कीमत प्रति ट्राली तीन टन 18 सौ रुपये में आती है। घुरूवा खाद गांव में ही मात्र 60 पैसे किलो में तैयार हो जाती है। राज्य सरकार 10 गुना कीमत पर छह रुपये किलो के दर से किसानों के ऊपर दबाव डालकर खराब गोबर बेचना चाह रही है, ताकि खराब गोबर खरीदने पर ही उन्हें रासायनिक खाद प्रदान किया जाएगा। जितेंद्र वर्मा ने कहा कि 10 गुना ज्यादा कीमत पर राज्य सरकार बेचकर किसानों के ऊपर कर्ज का बोझ लादने का सीधे तौर पर कार्य कर रही है। गोधन न्याय योजना से हुए नुकसान की भरपाई को किसानों से करने की योजना बनाई है। राज्य सरकार का यह तुगलकी फरमान पूरी तरह अन्यायपूर्ण किसान विरोधी हैं। यदि किसानों के ऊपर दबाव डालकर गलत तरीके से खराब गोबर खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है तो इसका जमकर विरोध किया जाएगा। गौधन न्याय योजना के अंर्तगत गोबर खरीदी से लेकर उसके अंतिम निष्पादन तक की पूरी प्रक्रिया का स्वेत पत्र जारी करे। प्रदेश के कांग्रेस सरकार दो रुपये प्रति किलो में लोगो से गोबर खरीद कर सेवा सहकारी बैंकों के माध्यम से वर्मी कंपोस्ट के नाम से 10 रुपये प्रति किलो किसानों को बेच रही है। 30 किलो 300 रुपये प्रति बोरी, पांच गुना अधिक दाम पर किसानों को खरीदने के लिए दबाव बना रही है। हिन्दुस्थान समाचार/अभय जवादे




