धमतरी, 30 मई ( हि. स.)। अंचल में खरीफ सीजन की तैयारी शुरू हो गई है। किसान खेतों में धान फसल के लिए नर्सरी लगाने में जुट गए हैं। खेतों की साफ सफाई कर रबी धान फसल की पराली किसान बेखौफ जला रहे हैं। इस साल पराली नहीं जलाने कोई जागरुकता अभियान नहीं चलाया गया। नौतपा को पूरे होने में चार दिन और शेष है। इस बीच तापमान का पारा 41 डिग्री पार कर चुका है। जून माह आने में एक दिन शेष है। ऐसे में जिलेभर के किसान अब खरीफ फसल लेने की तैयारी में जुट गए हैं। बोर सिंचाई सुविधा वाले किसान अपने खेतों में रबी सीजन में लगाए धान फसल की मिंजाई के बाद खेतों पर रखे पराली को जलाकर साफ-सफाई कर रहे हैं। क्योंकि किसान रोपाई के लिए अब सप्ताह भर के भीतर खेतों में नर्सरी लगाना शुरू करेंगे। इस साल कृषि विभाग व जिला प्रशासन ने पराली नहीं जलाने को लेकर अभियान नहीं चलाया। इससे किसान बेफिक्र होकर खेतों पर पड़े पराली को बेखौफ होकर जला रहे हैं। ग्राम परसतराई, खरतुली, लोहरसी, पोटियाडीह, मुजगहन, श्यामतराई, अर्जुनी, देमार, भानपुरी, आमदी, खरेंगा, कोलियारी, करेठा, भटगांव, श्यामतराई, ईर्रा, कोर्रा, रांवा सहित अन्य क्षेत्रों में इन दिनों किसान अपने खेतों में पराली को जला रहे हैं, जो उनके खेतों के किसान मित्र कीट और पर्यावरण के लिए बहुत ही खतरनाक है। कुछ ही किसान खेतों में पड़े पराली को मवेशियों के लिए इकट्ठा कर रहे हैं। किसानों पर कृषि विभाग इस साल कार्रवाई करने दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। यही वजह है कि पराली जलाने में किसानों को किसी तरह का डर नहीं है। पराली जलाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध है। इसका पालन कराने कृषि विभाग मैदानी स्तर पर किसी तरह का अभियान नहीं चला पाया है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों में शासन स्तर से गोठान बनाया गया है, जहां पर पराली एकत्र नहीं किया गया है। जबकि पिछले साल प्रत्येक गोठनों में पराली एकत्र करने अभियान चलाया गया था। अभी भी पंचायत व किसानों के पास समय है कि वे गोठानों में मवेशियों के लिए बरसात के दिनों पर मवेशियों की भूख मिटाने के लिए पराली दान कर सकते हैं और इकट्ठा भी कर सकते हैं। इस संबंध में कृषि उपसंचालक जीएस कौशल ने किसानों से कहा कि वे खेतों में पड़े पराली न जलाए। मवेशियों के लिए संचय करें। पराली जलाने से किसान मित्र कीट नष्ट होते हैं। हिन्दुस्थान समाचार / रोशन




