नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। धोखाधड़ी तो आपने कई प्रकार की सुनी और देखी होगी। मगर आज हम आपको एक ऐसी धोखाधड़ी के बारे में बताएंगे जिसमें फर्जी कोर्ट चलाया जा रहा था। इस बात से ज्यादा आपको हैरानी यह जानकर होगी की यह फर्जी कोर्ट पिछले पांच साल से चल रहा था। आपको बता दें कि यह फर्जी कोर्ट गुजरात के गांधीनगर में चलाया जा रहा था।
खुद जज बनकर ऑर्डर दिया करता था
न्यूज एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधियारियों ने बताया कि उन्होंने गुजरात एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था जिसने एक फर्जी ट्रिब्यूनल बनाया था। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम मॉरिस सैमुअल क्रिश्चयन बताया गया है। फर्जी ट्रिब्यूनल में व्यक्ति खुद जज बनकर बैठा करता था। व्यक्ति ने ट्रिब्यूनल को कुछ ऐसा बनाया था जिससे आम इंसान को वहां जाकर कोर्ट जैसा महसूस हो। इसके अलावा व्यक्ति ने फर्जी ऑर्डर दिए थे। पुलिस की जांच में पता चला कि मॉरिस सैमुअल क्रिश्चियन ऐसे लोगों को अपने जाल में फंसाता था जिनके जमीन से जुड़े मामले होते थे। वह अपने क्लाइंट्स से इन मामलों को सॉल्व करने के लिए फीस भी लिया करता था।
लोगों को भ्रमित करने के लिए असली कोर्ट जैसा बनाया था फर्जी कोर्ट
पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आरोपी मॉर्स सैमुअल क्रिश्चयन लोगों के सामने खुद को कोर्ट का आधिकारिक मध्यस्थ के रुप में दिखाता था। जिसके बाद वो क्लाइंट्स को अपने गांधीनगर के दफ्तर में बुलाया करता था जो देखने में असली कोर्ट जैसा ही लगता है। वहां आरोपी प्रिसाइड़िग ऑफिसर बनकर ऑर्डर सुनाया करता था। उसके साथ उसके कुछ कर्मचारी भी थे जो वकील और पुलिस बनकर वहां उपस्थित रहते थे ताकि लोगों को असली कार्यवाही लगे।
पुलिस ने आरोपी को फेवरेबल ऑर्डर जारी कर लोगों को धोखा देने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
कैसे पकड़ा गया फ्रोर्ड?
गांधी नगर के सिविल कोर्ट के एक रजिस्ट्रार द्वारा करंज पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करायी गयी। इसके बाद ठग के खिलाफ एक्शन लिया गया और उसकी फर्जी अदालत का भांडा फोड़ दिया।
पुलिस की एक प्रेस रिलीज में बताया गया है कि 2019 में आरोपी क्रिश्चियन ने एक फर्जी तरीके से अपने क्लाइंट के लिए एक आदेश बनवाया। यह मामला सरकारी जमीन से जुड़ा था और यह डीसी के तहत था। क्लाइंट चाहता था कि जमीन उसके नाम पर दर्ज की जाए।
क्रिश्चियन ने इस फर्जी आदेश को लागू करवाने के लिए एक और वकील की मदद से शहर के सिविल कोर्ट में अपील की और अपने बनाए गए आदेश की कॉपी भी पेश की। लेकिन कोर्ट के रजिस्ट्रार हार्दिक देसाई ने पाया कि क्रिश्चियन ने न तो मध्यस्त किया था और न ही ट्रिब्यूनल का आदेश सही था। इसके बाद पुलिस में शिकायत की गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि क्रिश्चियन के खिलाफ 2015 में मणिनगर पुलिस स्टेशन में भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था।




