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Sunday, March 22, 2026
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फरीदाबाद : गांव बहादुरपुर की ये सब्जी बनी दक्षिण भारत की पसंद, जानें क्या है इसकी खासियत?

फरीदाबाद के गांव बहादुरपुर की पत्ता गोभी दक्षिण भारत वालों की पहली पंसद बन गई है। हैदराबाद से लेकर अहमदाबाद की मंडियों तक गांव के किसानों की ये फसल बिकती है।

फरीदाबाद, एजेंसी। गांव बहादुरपुर की पत्ता गोभी की फसल दक्षिण भारत के लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। यहां से गोभी हैदराबाद, नासिक, बंगलुरु, अहमदाबाद, कोलकाता, पीलीभीत, कानपुर, एनसीआर की मंडियों में बेची जाती है। गांव के 300 किसान इस फसल से जुड़े हुए हैं, जो मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

पत्ता गोभी की फसल लगाने के लिए ऐसी मिट्टी की है जरूरत

गांव बहादुरपुर मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर यमुना की पश्चिम दिशा में तीन किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। गांव की मिट्टी बालू रेत दोमट है। पानी मीठा है और सिंचाई के लिए बिजली के ट्यूबवेल लगे हुए हैं। पत्ता गोभी की फसल लगाने के लिए ऐसी मिट्टी की जरूरत होती है, जो पानी को तुरंत सोंख ले। गांव की मिट्टी में पानी लंबे समय तक जमा नहीं होता है। गांव के किसान पोलैंड, दक्षिणी कोरिया, जर्मनी, वियतनाम का बीज लेकर पत्ता गोभी की फसल लगाते हैं। फसल खेत में गूल बनाकर और हाथ से बीज चुभो कर तैयार की जाती है। अगस्त में किसान फसल को लगाते हैं और फिर यह फसल नवंबर से मंडियों में आनी शुरू होकर पूरी सर्दी मई-जून तक चलती है। एक एकड़ पर 25 से 30 हजार की लागत आती है। यह फसल 120 दिन में तैयार हो जाती है और एक एकड़ में कम से कम 200 क्विंटल से लेकर 500 क्विंटल तक फसल उत्पादन होता है।

 किसानों को हुआ फायदा

गांव के किसान संजय भाटी ने बताया कि मेरी फसल पिछले वर्ष पांच रुपये प्रति किलो ग्राम बिकनी शुरू हुई और अंत में 60 प्रति किलोग्राम तक बिकी। मुझे लागत काटकर एक लाख रुपये का फायदा हुआ। वहीं राजू नंबरदार का कहना है कि मुझे पत्ता गोभी की फसल का उत्पादन करने पर प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत हिसार में आयोजित कृषि मेले में सम्मानित कर चुके हैं। कृषि विज्ञान केंद्र भुपानी के विज्ञानी भी प्रशस्ति पत्र दे चुके हैं। प्रहलाद सिंह बांकुरा ने बताया कि हमारे गांव में जिसके पास भी अपनी जमीन है, वह पत्ता गोभी का ही उत्पादन करता है। अभी भी गांव में करीब 500 एकड़ जमीन में पत्ता गोभी लगी हुई है। वहीं बीर सिंह आढ़ती का कहना है कि मेरी डबुआ सब्जी मंडी में आढ़त है। पूरे गांव के किसान मेरी आढ़त पर फसल लेकर आते हैं। यहां से हम हैदराबाद, बंगलुरु, नासिक, अहमदाबाद, कोलकाता, पीलीभीत, कानपुर, एनसीआर के आढ़तियों से संपर्क करके फसल को बेचते हैं। इन शहरों के आढ़ती हमारी फसल को प्राथमिकता पर खरीदते हैं। पत्ता गोभी सलाद, चाऊमीन, बर्गर, मोमोज व सब्जी बनाने के काम आती है।

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