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Thursday, March 12, 2026
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अब कैश का झंझट खत्‍म! पोस्‍ट ऑफिस काउंटर पर अगस्त से कर सकेंगे ऑनलाइन पेमेंट, जानें डिटेल्‍स

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इंडिया पोस्ट ने अपने IT सिस्टम में एक नए एप्लिकेशन के रोलआउट को पूरा करने पर काम कर रहा है। अब अगस्‍त से डाकघर के काउंटर पर भी डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । इस साल अगस्‍त से पोस्ट ऑफिस की सेवा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ऐसे में अगर आप किसी काम की वजह से डाकघर आते-जाते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दरअसल, अब देशभर के पोस्ट ऑफिस काउंटर पर आगामी अगस्त महीने से ऑनलाइन पेमेंट कर सकेंगे। 

अगस्‍त में डिजिटल भुगतान शुरु 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इंडिया पोस्ट ने अपने IT सिस्टम में एक नए एप्लिकेशन के रोलआउट को पूरा करने पर काम खत्म कर लिया है। इसके बाद फिर अगस्त से काउंटरों पर डिजिटल भुगतान स्वीकार करना शुरू करने का फैसला किया है।

अकाउंट UPI सिस्टम से हो जाएंगे सिंक

रिपोर्ट के मुताबिक, डाकघर अभी डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके अकाउंट UPI (यूनिक पेमेंट इंटरफेस) सिस्टम से सिंक नहीं हैं। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि, डाक विभाग अपने IT इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्‍टम को लागू कर रहा है जिसमें नए एप्लिकेशन होंगे जो डायनेमिक QR कोड के साथ लेनदेन करने में सक्षम होंगे। अगस्त 2025 तक सभी डाकघरों में रोलआउट पूरा हो जाएगा।

पायलट रोलआउट कर्नाटक सर्कल में शुरू

IT 2.0 के तहत इस सिस्टम का पायलट रोलआउट कर्नाटक सर्कल में शुरू किया गया है। मैसूर हेड ऑफिस, बागलकोट हेड ऑफिस और इसके अधीनस्थ कार्यालयों में मेल उत्पादों की क्यूआर-आधारित बुकिंग सफलतापूर्वक की गई। 

टेक समस्‍या के चलते प्‍लान बंद 

डाक विभाग के मुताबिक, डिजिटल लेनदेन को एनेबल करने के लिए पोस्ट ऑफिस में बिक्री काउंटरों पर स्थिर क्यूआर कोड पेश किया था। लेकिन बार-बार होने वाली टेक समस्याओं और ग्राहकों की शिकायतों के चलते, इस आइडिया को बंद करना पड़ा।

पोस्ट ऑफिस को लेकर सरकार ने की है यह पहल

भारत सरकार देश को 1.5 लाख ग्रामीण डाकघरों के साथ एक बड़े लॉजिस्टिक्स संगठन में बदलने पर काम कर रही है। हाल के वर्षों में डाकघरों में काफी बदलाव किया गया है और उन्हें ग्रामीण भारत में समुदायों, खासकर महिलाओं के वित्तीय समावेशन के लिए बैक बोन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

 सरकार के मुताबिक, जहां औसतन राष्ट्रीय बैंकों में महिलाओं के 20 प्रतिशत खाते हैं, वहीं भारत के पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत के बाद से 45 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के खाते खोले गए हैं। 

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