लखनऊ, 28 सितम्बर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में शराब बनाने को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार शराब इंडस्ट्री लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। शराब बनाने के नासिक मॉडल से प्रेरणा लेते हुए, आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में शराब इंडस्ट्री लगाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए शराब निर्माता संघ से मुलाकात की। महाराष्ट्र में नासिक भारतीय शराब उत्पादन के केंद्र के रूप में उभरा है। शराब निर्माण की नीति रखने वाले राज्य के पास अब तक एक भी यूनिट नहीं है। प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव, (आबकारी) संजय भूसरेड्डी के अनुसार, यूपी में आम, जामुन, कटहल, अमरूद, अंगूर, लीची, आंवला और पपीता जैसे कई फल उगाए जाते हैं और उत्पादित बड़ी मात्रा में पूरी तरह से उपयोग भी नहीं किया जाता है। बहुत कुछ फलों के उचित भंडारण की सुविधा के अभाव में उपज बर्बाद हो जाती है। भूसरेड्डी ने कहा कि, अगर यहां वाइनरी स्थापित की जाती हैं, तो इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा, किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा और राज्य को शराब की बिक्री से राजस्व अर्जित होगा। सभी फलों का भी उपयोग किया जाएगा। आबकारी आयुक्त सेंथिल पांडियन सी. ने कहा, एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत आबकारी विभाग उन जिलों की पहचान करेगा, जहां फलों की खेती अधिक है और उपज का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया जाता है ताकि ऐसे क्षेत्रों में वाइनरी स्थापित की जा सके। ऑल इंडिया वाइन प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश होल्कर ने यूपी सरकार को आश्वासन दिया है कि वह राज्य में वाइनरी स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहनों के बारे में संभावित निवेशकों को अवगत कराएंगे। –आईएएनएस एचके/आरजेएस




