Budget 2024 में महिलाओं को मिल सकती है बड़ी छूट, NPS पर मुहर की संभावना

Budget 2024 Updates: अंतरिम बजट को लेकर हर दिन नए-नए दावे किए और कयास लगाए जा रहे हैं। इस कड़ी में अब महिलाओं को बड़ी छूट मिलने की बात कही जा रही है।
अंतरिम बजट से महिलाओं की अपेक्षाएं।
अंतरिम बजट से महिलाओं की अपेक्षाएं।रफ़्तार।

नई दिल्ली, रफ्तार। अंतरिम बजट को लेकर हर दिन नए-नए दावे किए और कयास लगाए जा रहे हैं। इस कड़ी में अब महिलाओं को बड़ी छूट मिलने की बात कही जा रही है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक नई पेंशन प्रणाली (NPS) को आकर्षक बनाने के साथ महिलाओं के लिए अलग से कुछ कर छूट दी जा सकती है। इसके साथ ही चुनावी वर्ष में मानक कटौती की राशि बढ़ाकर नौकरी-पेशा और मध्यम वर्ग को कुछ राहत देने की भी संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) संसद में एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगी। उनका यह छठा बजट है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं बेंगलुरु स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति एनआर भानुमूर्ति ने कुछ मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में बताया है कि सरकार के पिछले रुख को देखते हुए इस अंतरिम बजट के लोकलुभावन होने की संभावना नहीं है। इसकी वजह है कि प्रधानमंत्री पहले ही गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) जैसे कुछ उपायों का ऐलान कर चुके हैं। उनके आने वाले साल में भी जारी रहने की संभावना है। हालांकि, ऐसी उम्मीदें हैं कि कई राज्यों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) के राजनीतिक मुद्दा बनने के मद्देनजर सरकार पेंशन व्यवस्था (NPS) को आकर्षक बनाने के लिए संभवत: बजट में कुछ घोषणा कर सकती है।

कई राज्य और केंद्रीय कर्मी कर रहे मांग

उल्लेखनीय है कि पंजाब, राजस्थान समेत कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू हुई है। इसे देखते हुए अन्य राज्य एवं केंद्रीय कर्मचारी भी पुरानी पेंशन लागू करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) की समीक्षा और उसमें सुधार के लिए वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में अप्रैल 2023 में समिति बनाई थी। समिति संभवत: इस महीने के अंत में अपनी रिपोर्ट देगी।

'आयकर व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद नहीं'

भानुमूर्ति ने बताया कि यह अंतरिम बजट होगा। ऐसे में कर व्यवस्था (Tax Regime) में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका मकसद पूरे साल का बजट पेश होने तक केवल व्यय बजट के लिए मंजूरी लेनी होता है। वैसे भी कर व्यवस्था और संरचना में बार-बार बदलाव से अनुपालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए मुझे आयकर व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद नहीं है।

ये योजनाएं रखी जाएंगी बरकरार

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टडीज के चेयरमैन सुदिप्तो मंडल ने बताया कि पिछले अनुभव से पता चलता है कि इस सरकार ने राजकोषीय नीतियों का पालन किया है। उदाहरण के लिए चुनावी वर्ष 2019 में बहुत अधिक लोकलुभावन योजनाओं एवं खर्च का सहारा नहीं लिया गया, इसलिए मुझे आगामी बजट में बहुत अधिक लोकलुभावन योजनाओं की उम्मीद नहीं है। वैसे, किसान सम्मान निधि जैसी पुरानी योजनाएं बरकरार रह सकती हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी-पेशा और मध्यम वर्ग को आयकर मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है। मानक कटौती की राशि बढ़ाकर कुछ राहत दिए जाने की संभावना है। अभी मानक कटौती के तहत 50 हजार रुपए की छूट है।

महिलाओं की होगी बचत?

म्यूनिख स्थित इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस (आईआईपीएफ) की संचालन प्रबंधन मंडल की सदस्य की भूमिका भी निभा रही लेखा चक्रवर्ती का कहना है कि महिला मतदाताओं पर जोर को देखते हुए आयकर कानून की धारा 88-सी के तहत महिलाओं के लिए कुछ अलग से कर छूट मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि चूंकि भारतीय आबादी के मुकाबले आयकरदाताओं की संख्या बेहद कम है। इस लिहाज से महिलाओं और पुरुषों के लिए कर राहत से जुड़ी घोषणाओं का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।

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