नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करोड़ों करदाताओं के मन में लंबे समय से एक सवाल था-क्या सरकार पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) को पूरी तरह खत्म करने जा रही है? खासकर उन लोगों के लिए जो होम लोन, इंश्योरेंस और पीपीएफ जैसी बचतों के जरिए टैक्स बचाते हैं, यह चिंता और बढ़ गई थी। अब केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था फिलहाल समाप्त नहीं हो रही है और करदाता इसे अपनी सुविधा और बचत के हिसाब से चुन सकते हैं। इससे लाखों करदाताओं को योजना बनाने और टैक्स की रणनीति तैयार करने में राहत मिली है।
नई टैक्स व्यवस्था लोकप्रिय, लेकिन पुरानी का विकल्प बना रहेगा
रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीडीटी चेयरमैन रवि अग्रवाल ने माना कि नई टैक्स रिजीम को करदाताओं ने तेजी से अपनाया है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 88 प्रतिशत इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स अब अपने रिटर्न नई व्यवस्था के तहत भर रहे हैं, जो एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके बावजूद अग्रवाल ने भरोसा दिलाया कि करदाताओं के पास अभी भी दोनों विकल्प-पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था-में से किसी एक को चुनने की पूरी स्वतंत्रता होगी। सरकार का कहना है कि यह ट्रांजिशन सकारात्मक है, लेकिन किसी भी व्यवस्था को जबरदस्ती लागू करने का कोई इरादा नहीं है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था: संजीवनी उन करदाताओं के लिए जिनके पास बड़े निवेश और होम लोन हैं
जब 88% करदाता नई टैक्स व्यवस्था में चले गए हैं, तो सवाल उठता है-पुरानी व्यवस्था अभी भी किसके लिए फायदेमंद है? टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुरानी व्यवस्था लाखों लोगों के लिए अब भी बेहद उपयोगी है। नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर सचिन गर्ग के अनुसार, इसे तुरंत हटाना जल्दबाजी होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराणा बताते हैं कि यह उन लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है जिनके पास बड़े होम लोन हैं या जो अपनी सैलरी स्ट्रक्चर में HRA और LTA का फायदा उठाते हैं।
अगर आप सेक्शन 80C के तहत PF, PPF, जीवन बीमा में निवेश करते हैं, या होम लोन के ब्याज पर सेक्शन 24(b) के तहत छूट लेते हैं, तो पुरानी व्यवस्था के तहत टैक्स की गणना करने पर नई व्यवस्था की तुलना में कम टैक्स देना पड़ सकता है। यह उन करदाताओं के लिए सबसे उपयुक्त है जो वित्तीय अनुशासन का पालन करते हैं और लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं।
नई टैक्स रिजीम की लोकप्रियता के पीछे कारण
हालांकि पुरानी व्यवस्था में कई कटौतियों का लाभ मिलता है, फिर भी नई टैक्स व्यवस्था की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। एसवीएएस बिजनेस एडवाइजर्स के निदेशक शुभम जैन के अनुसार, पुरानी व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक ‘ट्रांजिशनल’ यानी बदलाव के दौर वाला विकल्प बनती जा रही है। नई व्यवस्था की सरलता और कम कागजी कार्रवाई इसे युवा और सरल फाइनेंसियल प्लानिंग करने वाले करदाताओं के बीच पसंदीदा बनाती है।
नई टैक्स व्यवस्था: युवाओं और नए नौकरीपेशा लोगों के लिए आसान विकल्प
नई टैक्स व्यवस्था उन युवाओं और नए नौकरीपेशा लोगों के लिए बिल्कुल सही है, जो निवेश के कागजात जुटाने और टैक्स बचाने की जटिल गणित में उलझना नहीं चाहते। इसमें टैक्स स्लैब की दरें कम हैं और बेसिक छूट की सीमा ज्यादा है। जिनके पास होम लोन नहीं है या जो भारी निवेश नहीं करते, उनके लिए नई व्यवस्था में टैक्स का बोझ कम होता है और रिटर्न भरना भी बेहद सरल और सहज हो जाता है।
धीरे-धीरे बदलेगी टैक्स की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पुरानी व्यवस्था को अचानक बंद करने की बजाय इसे धीरे-धीरे खत्म होने देगी। जैसे-जैसे पुराने होम लोन खत्म होंगे और निवेश के तरीके बदलेंगे, पुरानी व्यवस्था की जरूरत अपने आप कम हो जाएगी। एसवीएएस बिजनेस एडवाइजर्स के शुभम जैन के अनुसार, यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है-कर्ज की जिम्मेदारियां कम होंगी और नई पीढ़ी वर्कफोर्स में शामिल होगी, तब पुरानी टैक्स रिजीम की आर्थिक प्रासंगिकता धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, सरकार उन करदाताओं को निराश नहीं करना चाहती जिन्होंने अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग पूरी तरह पुरानी व्यवस्था के हिसाब से की है।





