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Monday, March 16, 2026
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अगस्त में सोने की कीमतें कम होंगी या आएगा जबरदस्त उछाल ? जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट्स

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। सोने की मांग सुरक्षित निवेश के तौर पर घटती दिख रही है। कीमतों में आने वाला बदलाव टैरिफ तनाव और अमेरिकी फेड रिजर्व की नरम नीति पर निर्भर करेगा।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । सोने की कीमतों में पिछले हफ्ते आई गिरावट के बाद निवेशकों की निगाहें अगस्त महीने पर टिक गई हैं। इंटरनेशनल मार्केट में सोने का भाव 1% से अधिक गिरकर 3,335.60 डॉलर पहुंच गया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। इसकी वजह है फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की आगामी बैठक और वैश्विक ट्रेड डील्स पर फैसला। 

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका है, जबकि 1 अगस्त की टैरिफ डेडलाइन भी तेजी से करीब आ रही है। इस अनिश्चितता ने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। कॉमेक्स (Comex), न्यूयॉर्क में अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा मूल्य 37.90 डॉलर या 1.12% गिरकर 3,335.60 डॉलर प्रति औंस पर आकर बंद हुआ। 

एक रिपोर्ट के अनुसार, वेंचुरा कमोडिटी एंड सीआरएम हेड एन.एस. रामास्वामी ने बताया कि अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ डेडलाइन को टालने पर चल रही बातचीत के कारण निवेशकों में बेचैनी देखी गई, जिसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ा है। पिछले दिनों सोने का भाव 3,438 डॉलर से गिरकर 3,335.60 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आगामी दिनों में अमेरिका और चीन के बीच कोई स्पष्टता नहीं आती है, तो यह गिरावट और गहरा सकती है।

अमेरिका-चीन में फिर ट्रेड पर बातचीत

सूत्रों के हवाले से खबर है कि अमेरिका और चीन के अधिकारियों ने स्टॉकहोम में दूसरे दौर की बातचीत शुरू कर दी है। यह बैठक दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव को कम करने और वैश्विक स्तर पर बढ़ते ट्रेड वॉर से पीछे हटने की दिशा में एक अहम प्रयास मानी जा रही है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो टैरिफ समझौते को 90 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद है।

अगस्त में सोना रहेगा सुस्त या दिखेगा उछाल?

रामास्वामी का मानना है कि 1 अगस्त की टैरिफ डेडलाइन तक व्यापार समझौते में देरी से सोने की कीमत दबाव में रह सकती है। इस वक्त निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर कम होता दिख रहा है। उनके अनुसार, आगे चलकर सोने की चाल दो कारकों पर टिकी होगी, एक, अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव की दिशा, और दो, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में नरमी। इसके साथ ही अगर चीन का सेंट्रल बैंक दोबारा सोने की खरीदारी शुरू करता है, तो 2025 के अंत तक सोने के दामों में फिर से उछाल देखा जा सकता है। फिलहाल, बाजार में सोने की कीमत में तेज बढ़त या बड़ी गिरावट की संभावना कम नजर आ रही है।

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