नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश के करोड़ों लोगों का भरोसा बन चुका एचडीएफसी बैंक सिर्फ एक बैंक नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी निजी बैंकिंग संस्थाओं में से एक है। इसी लोकप्रियता के कारण अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि एचडीएफसी बैंक का मालिक कौन है और क्या इसका किसी धर्म से कोई संबंध है। सोशल मीडिया पर भी इस तरह की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
एचडीएफसी बैंक की कब हुई थी शुरुआत
एचडीएफसी बैंक लिमिटेड भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का बैंक है, जिसका मुख्यालय मुंबई में है। इसकी स्थापना वर्ष 1994 में हुई थी। यह बैंक हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HDFC) के तहत शुरू किया गया था। इसका मकसद भारतीय बैंकिंग सिस्टम में आधुनिक, पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित सेवाएं देना था।
संस्थापक का विजन, धर्म नहीं पहचान
HDFC संस्था की नींव 1977 में हसमुख ठाकोरदास पारेख ने रखी थी। उनका उद्देश्य आम लोगों को सस्ता और आसान होम लोन उपलब्ध कराना था। यहां यह समझना जरूरी है कि किसी कॉर्पोरेट संस्था की पहचान उसके काम, नीतियों और सेवाओं से होती है, न कि उसके संस्थापक के निजी धर्म से बैंक या किसी भी कंपनी का कोई धर्म नहीं होता।
एचडीएफसी बैंक का मालिक कौन है
एचडीएफसी बैंक किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। यह एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो शेयर बाजार में लिस्टेड है। इसका स्वामित्व हजारों शेयरधारकों में बंटा हुआ है, जिनमें विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) म्यूचुअल फंड आम निवेशक शामिल हैं यानी बैंक का कोई एक मालिक नहीं है, बल्कि यह सामूहिक शेयरहोल्डिंग के तहत चलता है। जून 2025 तक के सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार एचडीएफसी बैंक में प्रमोटर होल्डिंग शून्य है विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 48% से अधिक है घरेलू संस्थागत निवेशक और आम पब्लिक की भी बड़ी भागीदारी है यह साफ करता है कि बैंक पूरी तरह प्रोफेशनल और रेगुलेटेड कॉर्पोरेट ढांचे के तहत काम करता है।





