नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आप रिटायरमेंट या लंबी अवधि के लिए 1 करोड़ रुपये बचाने की योजना बना रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि महंगाई (Inflation) धीरे-धीरे आपके पैसे की क्रय शक्ति को खत्म कर देती है। आज जो 1 करोड़ रुपये एक बड़ा अमाउंट है, भविष्य में उसकी असली वैल्यू बहुत कम हो जाएगी। यह कैलकुलेशन यह साबित करता है कि सिर्फ सेविंग्स के भरोसे भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
1 करोड़ की फ्यूचर वैल्यू (औसत महंगाई दर 6% मानते हुए)
यदि औसत महंगाई दर 6% प्रति वर्ष मानी जाए, तो वर्ष 2025 में 1 करोड़ रुपये की क्रय शक्ति आने वाले दशकों में घटकर कितनी रह जाएगी, इसका विवरण नीचे दिया गया है।
समयावधि (साल बाद) वर्ष 1 करोड़ की क्रय शक्ति (घटकर)
10 साल बाद 2035 लगभग ₹55.83 लाख
20 साल बाद 2045 सिर्फ ₹31.18 लाख
30 साल बाद 2055 मात्र ₹17.41 लाख
40 साल बाद 2065 केवल ₹9.72 लाख
50 साल बाद 2075 ₹5.42 लाख
यानी, 50 साल बाद आपके 1 करोड़ रुपये की खरीदने की शक्ति 90% से भी ज्यादा खत्म हो चुकी होगी। नाम तो 1 करोड़ ही रहेगा, लेकिन वह सिर्फ 5.42 लाख रुपये के बराबर चीजें खरीद पाएगा।
क्या सिर्फ बचत काफी है?
नहीं! बचत खाते या नकद राशि में पैसा रखने से वह महंगाई का शिकार हो जाता है। महंगाई एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करती है, जो आपकी मेहनत की कमाई को साल-दर-साल कमजोर बनाती जाती है। महंगाई को नजरअंदाज कर बनाई गई कोई भी रिटायरमेंट प्लानिंग असफल हो सकती है।
फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए क्या करें?
सिर्फ बचत खाते या नकद राशि में पैसा रखना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि महंगाई एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह आपकी मेहनत की कमाई को साल-दर-साल कमजोर बनाती जाती है।आपको अपने पैसे को ऐसे एसेट्स में निवेश करना होगा जो मुद्रास्फीति को मात दे सकें।
फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि भविष्य में भी आपके पैसे की क्रय शक्ति आज जितनी ही बनी रहे या उससे बेहतर हो, तो सिर्फ बचत करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने पैसे को ऐसे एसेट्स में निवेश करें जो मुद्रास्फीति को मात दे सकें। निवेश के विकल्पों में शेयर बाजार, SIP, रियल एस्टेट, व्यवसाय या स्टार्टअप्स शामिल हैं। इन एसेट्स की ग्रोथ दर आमतौर पर महंगाई की दर से तेज होती है, जिससे लंबी अवधि में आपके पैसों की असली वैल्यू गिरने नहीं पाती, बल्कि समय के साथ बढ़ती रहती है। यही रणनीति फाइनेंशियल फ्रीडम की कुंजी है।
महंगाई को मात देने और फाइनेंशियल फ्रीडम सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि आपका वास्तविक रिटर्न हमेशा सकारात्मक हो, यानी निवेश पर प्राप्त रिटर्न से मुद्रास्फीति दर कम न हो। उदाहरण के लिए, बैंक FD या बॉन्ड्स से आपको लगभग 6.5% से 7.5% का रिटर्न मिल सकता है, जिससे मुद्रास्फीति पर केवल 0.5% से 1.5% का लाभ होता है, और यह छोटी से मध्यम अवधि के लिए उपयुक्त हैं।
पीपीएफ (PPF) से 7.1% का रिटर्न अपेक्षित है, जो मुद्रास्फीति से लगभग 1.1% अधिक है और मध्यम से लंबी अवधि के लिए बेहतर माना जाता है। रियल एस्टेट में निवेश से 8% से 10% तक रिटर्न की संभावना रहती है, जिससे मुद्रास्फीति पर 2% से 4% का लाभ मिलता है और यह लंबी अवधि के लिए लाभकारी है। संतुलित म्यूचुअल फंड (Hybrid/Balanced Funds) से 10% से 12% तक का रिटर्न संभव है, जो मुद्रास्फीति पर 4% से 6% का लाभ देता है और मध्यम से लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए उपयुक्त है। सबसे लंबी अवधि के निवेश, जैसे इक्विटी या शेयर बाजार में SIP, 12% से 15% तक का रिटर्न दे सकते हैं, जिससे मुद्रास्फीति पर 6% से 9% तक का लाभ होता है और यह विशेष रूप से रिटायरमेंट जैसे लंबे समय के लक्ष्यों के लिए आवश्यक है।
इक्विटी में निवेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 50 साल में 1 करोड़ रुपये की वैल्यू महंगाई के कारण केवल 5.42 लाख रुपये रह जाती है, और लंबी अवधि के लिए 12% से 15% का रिटर्न लक्ष्य केवल इक्विटी या शेयर बाजार आधारित निवेश (जैसे SIP) से ही पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा, जोखिम कम करने और बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूंजी को विविधीकृत करना जरूरी है, यानी इक्विटी, बॉन्ड/पीपीएफ और रियल एस्टेट का मिश्रण बनाना चाहिए। ध्यान रहे कि ये रिटर्न अनुमानित हैं और इसमें से टैक्स और अन्य लागतें भी घटेंगी, इसलिए आपका सकल रिटर्न (Gross Return) और अधिक होना चाहिए।





