नई दिल्ली, रफ्तार। भारत में सोने में निवेश की परंपरा बेहद पुरानी है। अब निवेश के कई विकल्प आने के बाद भी सोने के रिटर्न की चमक कम नहीं पड़ी है। ऐसा ताजा आंकड़े बताते हैं। सरकारी गोल्ड ने पोस्ट ऑफिस योजनाओं और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से भी ज्यादा रिटर्न दिया है। RBI की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की एक किस्त मैच्योर होने से पहले तगड़ा मुनाफा दे चुका है। RBI ने वित्त वर्ष 2017-18 का सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीरीज 1 के रिडेम्पशन प्राइस जारी कर दिया है।
2.5 गुना मिला रिटर्न
गोल्ड का रिडेम्पशन प्राइस प्रति यूनिट 7165 रुपये है। यह 4264 रुपये प्रति यूनिट का लाभ दे रहा। बता दें, 20 नवंबर 2017 को यह खरीदारी के लिए खुला था। तब 1 ग्राम गोल्ड की कीमत 2901 रुपये थी। मतलब वित्त वर्ष 2017-18 का सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीरीज 1 में निवेशकों को 7 साल के दौरान 147 फीसदी यानी 2.5 गुना रिटर्न मिला है। रिडेम्पशन प्राइस 29 अप्रैल से 3 मई 2024 के दौरान इंडियन बुलियन और ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने निर्धारित किया है।
समय से पहले भी बेच सकते हैं सोना
RBI के नियम कहते हैं कि कोई भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेशक समय से पहले सोना बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं। ऐसे में RBI द्वारा गोल्ड बॉन्ड का रिडेम्पशन प्राइस ऐलान के बाद कोई अभी SGB के तहत सोना बेचता है तो उसे 2.5 गुना पैसा मिलेगा। मतलब इस अवधि में किसी श्ख्स ने 1 लाख रुपये सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीरीज 1 में लगाए होते तो उसे अभी 2.47 लाख रुपए मिल जाते।
फिक्स इंटरेस्ट रेट भी मिल रही
आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के तहत फिक्स इंटरेस्ट रेट भी रखा है। यह सालाना 2.5 फीसदी है। ब्याज का भुगतान छह महीने पर होता है। इसकी लॉक-इन अवधि आठ साल है। हालांकि, निवेशकों के लिए एक रिडेम्पशन क्लॉज भी है। SGB प्रीमैच्योर रिडेम्पशन के लिए निवेशक कूपन पेमेंट डेट से 30 दिन पहले बैंक/स्टॉक होल्डिंग कॉपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) ऑफिस/ पोस्ट ऑफिस/ एजेंट से संपर्क साध सकते हैं। रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किए जाने के बाद पैसा बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा। प्रीमैच्योर पेमेंट और ब्याज का भुगतान 10 दिनों में होता है।
दो हिस्सों में बंटा है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड रिटर्न
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड रिटर्न को दो हिस्सों में बांटा गया है। यह है- बॉन्ड मैच्योरिटी पर मिले कैपिटल बेनिफिट और छमाही ब्याज आय। आरबीआई के अनुसार, बॉन्ड पर ब्याज आयकर अधिनियम 1961 (1961 का 43) के प्रावधानों के अनुसार टैक्स योग्य होगा। किसी को SGB के रिडेम्पशन पर हुए कैपिटल बेनिफिट पर टैक्स नहीं लगेगा। बॉन्ड के ट्रांसफर पर भी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर इंडेक्सेशन प्रॉफिट मिलता है। इस बॉन्ड पर TDS लागू नहीं होता है।
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