नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के लिए एक अहम और राहत के साथ चेतावनी भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने आयुष्मान कार्ड से जुड़े फर्जीवाड़े के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी कार्ड धारकों के लिए दोबारा KYC प्रक्रिया अनिवार्य करने का फैसला किया है। यदि तय समय के भीतर KYC नहीं कराई गई, तो न केवल इलाज में परेशानी हो सकती है, बल्कि आयुष्मान कार्ड रद्द भी किया जा सकता है।
दरअसल, बीते कुछ महीनों में प्रदेश के कई जिलों से आयुष्मान कार्ड के जरिए फर्जी बिलिंग और गलत तरीके से सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ अस्पतालों और बिचौलियों ने अपात्र लोगों के नाम पर इलाज दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान हासिल किया। इन गंभीर मामलों को देखते हुए प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क हो गया है।
इसी के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने Ayushman Card Beneficiary Identification System (BIS) को लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत सभी आयुष्मान कार्ड धारकों की पहचान और पात्रता की दोबारा जांच की जाएगी। सरकार का साफ कहना है कि जो भी लाभार्थी KYC प्रक्रिया पूरी नहीं करेगा, उसे योजना का लाभ मिलने में कठिनाई हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में करीब 61,932 आयुष्मान कार्ड धारक संदिग्ध पाए गए हैं। इन सभी मामलों की जिला स्तर पर गहन जांच की जा रही है। फील्ड इन्वेस्टिगेशन अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयुष्मान योजना का लाभ केवल पात्र और वास्तविक लाभार्थियों को ही मिले।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सभी जिलाधिकारियों को संदिग्ध आयुष्मान कार्डों की जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी कार्ड में गड़बड़ी पाई जाती है, तो ऐसे कार्ड तुरंत निरस्त कर दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, फिलहाल आयुष्मान कार्ड में नए सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया भी रोक दी गई है और कुछ समय के लिए नए कार्ड बनाने पर भी अस्थायी रोक लगाई गई है।
सरकार का मानना है कि KYC प्रक्रिया को सख्त करने से फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सकेगा। अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में मृत व्यक्तियों, अपात्र परिवारों या एक ही व्यक्ति के नाम पर कई कार्ड बनाए जाने की शिकायतें मिली हैं, जिससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे थे।
गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है, जिसके तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का उद्देश्य यह है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी नागरिक इलाज से वंचित न रहे।
सरकार ने साफ संदेश दिया है कि जिन लोगों ने अब तक KYC नहीं कराई है, वे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लें। ऐसा न करने पर अस्पतालों में इलाज के समय आयुष्मान कार्ड मान्य नहीं होगा और लाभार्थियों को जेब से खर्च करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए यह समय बेहद अहम है। योजना का लाभ जारी रखने के लिए KYC कराना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। सरकार की यह सख्ती जहां एक ओर फर्जीवाड़े पर रोक लगाएगी, वहीं वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहेंगी।




