नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। रिजर्व बैंक ने आज मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्विमासिक समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा कर दी। जिसमें रिजर्व बैंक ने लगातार 11वीं बार रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। जिसके कारण आम आदमी को बैंकों से महंगा लोन मिलेगा साथ ही पुराने लोन की EMI भी कम नहीं होगी।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने कहा कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विशेषज्ञों ने पहले ही रिजर्व बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने की जानकारी दी थी। इस बैठक में एमपीसी ने 4-2 की मैज्योरिटी के साथ रेपो रेट को 6.5 फीसदी रखने का ऐलान कर दिया है। वहीं SDF रेट भी 6.25% और एमएसएफ रेट 6.75% पर स्थिर है। यह मीटिंग 4 दिसंबर को शुरु हुई थी और आज इसका आखिरी दिन था। दास ने कहा कि मौद्रिक नीति का व्यापक प्रभाव है। समाज के हर क्षेत्र के लिए कीमत स्थिरता जरूरी है और हम आर्थिेक वृद्धि को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं। RBI अपनी मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखेगा।
रेपो रेट में बदलाव का जनता पर क्या असर?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से लोगों को महंगे कर्ज से अब राहत की कोई उम्मीद नहीं है। यदि रेपो रेट कम होता तो बैंक कम ब्याज दर पर लोगों को कर्ज देते। आरबीआई की छह सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 4-2 के अनुपात में रेपो रेट में बदलाव ना करने का फैसला लिया गया। यानी 6 में से 4 सदस्यों ने रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने में सहमति जताई।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से शेयर मार्केट गिरा
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का असर शेयर मार्केट में गिरावट के साथ दिखा। सेंसेक्स 167.32 अंकों की गिरावट के साथ 81,598.54 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 57.45 अंक गिरकर 24,650.95 पर आ गया। इससे पहले शुक्रवार को शेयर मार्केट की अच्छी शुरूआत हुई थी।
जानिए क्या होती है रेपो रेट (What is Repo Rate)
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये आरबीआई इस दर का उपयोग करता है। रेपो दर के यथावत रहने का मतलब है कि मकान, वाहन समेत विभिन्न कर्जों पर मासिक किस्त में कोई बदलाव नहीं होगा।




