नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। याद है हम सब सोचते थे कि क्या हमारा फोन भी हम सबकी बात सुन रहा है तो इसका जवाब है हां। लंबे समय से लोगों का यह शक अब सच्चाई बन चुका है। एक मार्केटिंग फर्म ने इस बात की पुष्टि की है कि कुछ स्मार्टफोन ऐसे सॉफ्टवेयर के साथ आते हैं जो हमारी बाते सुनते हैं।
फर्म के क्लाइंट है गूगल और फेसबुक
इस फर्म के क्लाइंट Google और Facebook हैं, और इस फर्म ने माना है कि वे फोन के माइक्रोफोन का इस्तेमाल जानकारी जुटाने के लिए करते हैं। इसका मतलब ये है कि अगर आप अपनी मां से कॉफी मेकर खरीदने की बात कर रहे हैं तो आपका फोन यह बात सुन रहा है। वो इससे संबंधित एड आपको दिखाने लगेगा। आपको लगेगा कि आपने इसको गूगल किया होगा लेकिन इसमें सच्चाई नहीं है।
404 मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ आप जो सर्च करते हैं वही नहीं, बल्कि फोन के पास जो आप बोलते हैं, उससे भी आपको विज्ञापन दिखते हैं। पहले हमारे पास इससे संबंधित सबूत नहीं थे कि फोन हमारी बात सुन रहा है लेकिन अब हमारे पास इसके सबूत है।
AI का इस्तेमाल करके यूजर्स के इरादे पता करती है
एक रिपोर्ट के अनुसार, कॉक्स मीडिया ग्रुप, जो टीवी और रेडियो समाचार में बड़ा नाम है, उसने निवेशकों को बताया कि उनकी एक तकनीक है जो एआई का इस्तेमाल करके यूजर्स के इरादे पता करती है। कंपनी ने यह भी बताया कि इस तकनीक से एडवेटाइजर्स यूजर्स के व्यवहार का डेटा और उनकी बातचीत का डेटा साथ में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे एडवेटाइजर्स उन यूजर्स को टारगेट कर सकते हैं जो कुछ खरीदने के बारे में सोच रहे हैं। यह टारगेट विज्ञापन के लिए एक बहुत ही शक्तिशाली उपकरण है।
मेटा और अमेजन का क्या कहना है?
मेटा और अमेजन इस मार्केटिंग फर्म के साथ जुड़े हुए हैं। इसलिए दोनों ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है। लीक हुई जानकारी से पता लगा है कि इस एजेंसी ने यूजर्स का डेटा बिना उनकी जानकारी के इकट्ठा किया और इस्तेमाल किया हो सकता है। इस वजह से मेटा इस एजेंसी के नियमों और शर्तों की जांच कर रही है।
वहीं दूसरी ओर अमेजन ने कहा कि इस मार्केटिंग एजेंसी के डेटा गोपनीयता वाले मामले में उनका कोई हाथ नहीं है और वे इस एजेंसी के साथ काम नहीं करेंगे।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उन्हें पता चला कि उनके किसी पार्टनर ने उनके नियमों का उल्लंघन किया है, तो वे तुरंत कानूनी कार्रवाई करेंगे। इससे साफ है कि अमेजन यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखना चाहता है और अपने नियमों का पालन करना चाहता है।
उनकी राय में, कॉक्स मीडिया ग्रुप ने एक बार हटाए गए पोस्ट में कहा था कि उपयोगकर्ता हर बार एक नया ऐप डाउनलोड करने पर एक्टिव लिसनिंग तकनीक से सहमत होते हैं।
उनकी राय में, कॉक्स मीडिया ग्रुप ने एक बार हटाए गए पोस्ट में कहा था कि उपयोगकर्ता हर बार एक नया ऐप डाउनलोड करने पर एक्टिव लिसनिंग तकनीक से सहमत होते हैं।
उस पोस्ट में कहा गया था कि “हम जानते हैं कि आप क्या सोच रहे हैं। क्या यह कानूनी भी है? फोन और डिवाइस के लिए आपकी बात सुनना कानूनी है। जब कोई नया ऐप डाउनलोड या अपडेट करते हैं तो उपभोक्ताओं को कहीं न कहीं बारीक प्रिंट में उपयोग की शर्तों के बहु-पृष्ठ समझौते के साथ संकेत देता है। इसमें ध्यान से सुनना अक्सर शामिल रहता है।





