नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर इसके स्थान पर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM G विधेयक, 2025’ लाने की तैयारी है। इस नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हों, हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का मजदूरी रोजगार कानूनी तौर पर गारंटीकृत मिलेगा।
क्यों जरूरी है नया कानून?
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मनरेगा ने बीते 20 सालों में ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन समय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आए सामाजिक-आर्थिक बदलाव और सरकारी योजनाओं के विस्तार ने नई और आधुनिक व्यवस्था की जरूरत पैदा कर दी है। जहां मनरेगा मुख्य रूप से आजीविका सुरक्षा पर केंद्रित था, नया विधेयक सशक्तिकरण, विकास और समृद्धि पर जोर देगा। इसके तहत सार्वजनिक कार्यों को एकीकृत करके ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक’ तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
कौन-कौन से क्षेत्रों में होगा काम
नई योजना के तहत मुख्य रूप से ये क्षेत्र प्राथमिकता में रहेंगे जिसमें, जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास, आजीविका आधारित अवसंरचना, अत्यधिक मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य साथ ही, कृषि के चरम मौसम में खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी यह कानून मददगार होगा।
राज्यों को मिलेगा लचीलापन
नए विधेयक में राज्यों को यह अधिकार होगा कि वे बुवाई और कटाई के मौसम के अनुसार कार्यों की अवधि तय कर सकें। इससे कृषि गतिविधियों के दौरान श्रमिकों की कमी नहीं होगी।
डिजिटल और तकनीकी बदलाव
कानून के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए आधुनिक डिजिटल सिस्टम लागू होगा। इसमें शामिल होंगे:-
बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण
जीपीएस या मोबाइल आधारित कार्यस्थल निगरानी
रियल-टाइम एमआईएस डैशबोर्ड
सार्वजनिक जानकारी का स्वतः प्रकटीकरण
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए योजना निर्माण और ऑडिट
केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारी
योजना केंद्रीय प्रायोजित होगी। कानून लागू होने के छह महीने के भीतर प्रत्येक राज्य को रोजगार गारंटी लागू करने की अपनी कार्ययोजना बनानी होगी। केंद्र सरकार वार्षिक आवंटन तय करेगी, जबकि अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
मनरेगा का इतिहास
मनरेगा कानून 2005 में लागू हुआ था। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान किया जाता था। संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा, और इस विधेयक पर चर्चा इसी सत्र में होने की संभावना है।




