नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जरूरी ITR फॉर्म्स को अप्रैल के अंत में अधिसूचित कर दिया है। इसके बाद से टैक्सपेयर्स अपने दस्तावेज तैयार करने में जुट गए हैं। हालांकि, अब तक आयकर विभाग ने रिटर्न दाखिल करने के लिए जरूरी यूटिलिटीज या ऑनलाइन फाइलिंग टूल्स को एक्टिव नहीं किया है। संभावना है कि ये सुविधाएं जल्द ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही यूटिलिटी या सॉफ्टवेयर फॉर्म्स उपलब्ध होते हैं, लोग रिटर्न फाइल करने की जल्दबाजी में न पड़ें। अक्सर देखा गया है कि शुरुआती दौर में सिस्टम में कुछ तकनीकी गड़बड़ियां रह सकती हैं, जो रिटर्न फाइलिंग में गलती का कारण बन सकती हैं। ऐसी स्थिति में बाद में विभाग की ओर से नोटिस आने की आशंका रहती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि टैक्सपेयर्स 15 जून तक इंतजार करें और उसके बाद ही सभी जरूरी जांच-पड़ताल के साथ रिटर्न फाइल करें।
आखिर क्यों जरूरी है 15 जून तक इंतजार करना?
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले कुछ अहम दस्तावेजों का होना बेहद जरूरी होता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं फॉर्म 16 और फॉर्म 16A, जो टीडीएस (TDS) यानी स्रोत पर कर कटौती जो संबंधित जानकारी देते हैं। खासतौर पर फॉर्म 16, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए जरूरी दस्तावेज है, जिसमें उनके वेतन से की गई टैक्स कटौती का पूरा विवरण होता है। आमतौर पर कंपनियां और नियोक्ता यह फॉर्म 15 जून तक जारी करते हैं। ऐसे में अगर आप इससे पहले रिटर्न फाइल करने की कोशिश करते हैं तो आपके पास जरूरी जानकारी अधूरी हो सकती है। नतीजतन, आयकर रिटर्न में गलत जानकारी भरने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज, खासकर फॉर्म 16 और फॉर्म 16A, प्राप्त कर लें और फिर सही जानकारी के साथ फाइलिंग करें।
विशेषज्ञों की सलाह
चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश हेगड़े ने बताया कि कई बार करदाता वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2025 के बीच हुई आय पर कटे TDS की जानकारी के बिना ही इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर देते हैं। ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे रिटर्न में गलत जानकारी भरने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि एंप्लॉयर या भुगतान करने वाले संस्थान को 31 मई 2025 तक e-TDS रिटर्न दाखिल करना होता है, जिसमें उस तिमाही की आय और टैक्स कटौती का पूरा विवरण शामिल होता है। अगर करदाता यह जानकारी मिलने से पहले रिटर्न फाइल करता है, तो बाद में सुधार की जरूरत पड़ सकती है।
गलत जानकारी पर आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस
चार्टर्ड अकाउंटेंट हेगड़े ने आगे चेतावनी दी कि यदि कोई करदाता 15 जून से पहले आयकर रिटर्न दाखिल करता है, तो संभव है कि वह फॉर्म 26AS, फॉर्म 16/16A और एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जैसे आवश्यक दस्तावेजों के बिना ही रिटर्न जमा कर दे। ऐसे मामलों में रिटर्न में दी गई जानकारी अधूरी या गलत हो सकती है। यदि टैक्स डिपार्टमेंट को रिटर्न में विसंगति नजर आती है, तो वह संबंधित करदाता को नोटिस भेज सकता है। इसके बाद आपको रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना पड़ेगा, जिसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है। इस प्रक्रिया में अतिरिक्त समय और काफी मेहनत लगती है। इसलिए सलाह है कि जब तक आपके पास सभी जरूरी दस्तावेज न हों, तब तक आयकर रिटर्न दाखिल करने से बचें।





