नई दिल्ली, रफ्तार। सोना ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार इसके भाव में इजाफा हो रहा है। इसकी वजह है कि देश में हर वर्ग के लोगों में सोने के प्रति खास लगाव। गरीब या अमीर हो, हर परिवार सोने के गहने खरीदने और पहनने की इच्छा रखता है। दरअसल, सोने के गहने शान बढ़ाने के साथ बुरे वक्त में आर्थिक तौर पर भी मजबूती देते हैं। सोने के गहनों को रखकर आप आसानी से लोन ले सकते या बेचकर तुरंत पैसे पा सकते हैं।
सोने के गहने खरीदना सिक्के की अपेक्षा सही नहीं
हालांकि ज्यादातर लोग शायद नहीं जानते हैं कि सोने के जेवर खरीदना निवेश के लिहाज से सही नहीं है। अगर, कैलकुलेशन देखें तो यह नुकसान का सौदा साबित होता है। हम आपको बता रहे हैं कि निवेश के लिहाज से गोल्ड ज्वेलरी और गोल्ड बिस्किट या सिक्के खरीदने में क्या ज्यादा बेहतर है?
जेवर पर बदलें सोच
किसी भी ज्वेलरी शॉप में अलग-अलग डिजाइनों के आभूषण कई लोगों को आकर्षित करते हैं। सोने की चमक और ज्वेलरी के डिजाइन को देखकर लोग आभूषण खरीद लेते हैं। वो सोचते हैं कि कुछ साल पहन लगेंगे और फिर बाद में बेचने पर अच्छा रिटर्न भी मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है।
मेकिंग चार्ज के रूप में अच्छा-खासा खर्च
सोने के गहने पर खरीदने या बनवाने पर मेकिंग चार्ज देना होता है। मगर, जब आप गहने बेचते या एक्सचेंज करते हैं तो मेकिंग चार्ज के पैसे नहीं मिलते हैं। अगर, सोने का बिस्किट खरीदते हैं तो इसमें ऐसा नहीं होता है। गोल्ड ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज प्रति ग्राम और कुल रकम के हिसाब से देना होता है। वैसे, यह डिजाइन के हिसाब से अलग-अलग देना पड़ता है। मेकिंग चार्ज प्रति ग्राम 250 रुपये और कुल रकम पर 10-12 प्रतिशत हो सकती है। आप 6 लाख रुपये की गोल्ड ज्वेलरी बनवाते हैं तो 10 फीसदी मेकिंग चार्ज के तौर 60 हजार रुपये देने होते हैं। वहीं, गोल्ड ज्वेलरी बनवाने पर सोने की शुद्धता के लिए फिल्टर चार्ज भी देना पड़ता है।
बेचने पर पूरी कीमत नहीं मिलती
गोल्ड ज्वेलरी बेचने पर पूरी कीमत भी नहीं मिलती है। आभूषण बनाने में गोल्ड के साथ अन्य धातु मिलाए जाते हैं। आप जब भी गहने को बेचते हैं तो भुगतान गोल्ड की मात्रा के मुताबिक किया जाता है, लेकिन बिस्किट या सिक्के में ऐसा नहीं होता है।
नफा-नुकसान का अंतर भी समझें
आप 10 ग्राम गोल्ड के गहने खरीदते हैं तो मौजूदा भाव 71500 रुपये, फिर मेकिंग चार्ज और फिल्टर चार्ज देना होगा। यह प्रति ग्राम 6 हजार से ज्यादा होता है। वहीं, सोने का बिस्किट या सिक्के खरीदने पर सिर्फ 71500 रुपये देना पड़ेगा। वहीं, जब गहने को बेचने जाएंगे तो मेकिंग चार्ज और फिल्टर चार्ज वापस नहीं मिलेगा। ज्वेलरी पर कटौती के साथ भुगतान किया जाएगा, क्योंकि पेमेंट ज्वेलरी में गोल्ड की मात्रा के आधार पर होगा। इस कारण निवेश के लिहाज से ज्वेलरी खरीदना नुकसान का सौदा साबित होता है।
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