back to top
33.1 C
New Delhi
Tuesday, March 10, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

बगैर डीमैट अकाउंट सोने में निवेश संभव, गोल्ड म्यूचुअल फंड्स क्यों बन रहे हैं निवेशकों की पहली पसंद

गोल्ड म्यूचुअल फंड्स निवेशकों के लिए आसान और सुरक्षित विकल्प बन गए हैं क्योंकि इसमें बिना डीमैट अकाउंट के भी सोने में निवेश किया जा सकता है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में सोना हमेशा से ही भरोसेमंद निवेश का प्रतीक रहा है, लेकिन अब डिजिटल क्रांति के दौर में इसमें निवेश का तरीका भी बदल गया है। असली सोना खरीदकर उसे लॉकर में रखने की झंझट से बचने के लिए, निवेशक तेजी से गोल्ड म्यूचुअल फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं। ये फंड्स दरअसल फंड ऑफ फंड्स होते हैं, जो सीधे फिजिकल गोल्ड में नहीं, बल्कि गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में पैसा लगाते हैं, और इस तरह निवेशकों को सोने के दाम के उतार-चढ़ाव पर आधारित रिटर्न देते हैं। इन फंड्स का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि गोल्ड ईटीएफ के विपरीत, इनमें निवेश के लिए डीमैट अकाउंट की आवश्यकता नहीं होती, जिससे आम निवेशकों के लिए यह प्रक्रिया बेहद सरल हो जाती है।

गोल्ड म्यूचुअल फंड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कई कारण हैं। निवेशक मात्र ₹500 की छोटी राशि से भी SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) शुरू कर सकते हैं, जिससे बड़ी एकमुश्त राशि की जरूरत खत्म हो जाती है। इसके अलावा, फिजिकल गोल्ड में लगने वाले 5-15% तक के मेकिंग चार्ज की इसमें कोई कटौती नहीं होती और निवेशकों को 99.5% शुद्ध डिजिटल गोल्ड का भरोसा मिलता है। ये फंड्स SEBI द्वारा नियंत्रित होते हैं, जिससे ये सुरक्षित निवेश विकल्प बन जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ये खरीदना और बेचना बेहद आसान हैं और पैसा कुछ दिनों में सीधे बैंक अकाउंट में आ जाता है।

हालांकि, निवेश करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। निवेशकों को फंड हाउस द्वारा लिए जाने वाले एक्सपेंस रेशियो (आमतौर पर 0.5% से 1% तक) को देखना चाहिए। कर नियमों के अनुसार, 24 महीने से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (आय स्लैब के अनुसार टैक्स) और 24 महीने बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (12.5% + सेस) टैक्स लगता है। निवेश शुरू करने के लिए, आपको बस ऑनलाइन KYC पूरा करना होगा, किसी भरोसेमंद AMC (जैसे SBI, HDFC) का गोल्ड फंड चुनना होगा, और SIP या एकमुश्त राशि तय करके निवेश पूरा करना होगा। गोल्ड ईटीएफ की तुलना में, गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में न्यूनतम निवेश की सीमा कम होती है और यह बाजार बंद होने के बाद NAV (नेट एसेट वैल्यू) के आधार पर खरीदा जाता है।

अतिरिक्त जानकारी

यदि आप गोल्ड म्यूचुअल फंड को 24 महीने के बाद बेचते हैं, तो आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगता है, जिसकी दर 12.5% है।

अधिकांश गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में SIP के माध्यम से न्यूनतम निवेश की शुरुआत ₹500 से की जा सकती है, जबकि गोल्ड ईटीएफ में कम से कम 1 यूनिट खरीदना अनिवार्य होता है।

Advertisementspot_img

Also Read:

FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जैसे जैसे निवेश के नए नए तरीके सामने आ रहे हैं वैसे वैसे लोग उन्हें अपनाते जा रहे है। हालांकि एक...
spot_img

Latest Stories

किसी भी जनसभा में उड़ा दूंगा…’ BJP विधायक नंदकिशोर गुर्जर को जान से मारने की धमकी

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। गाजियाबाद के लोनी से बीजेपी विधायक...

कार्तिक आर्यन से आर माधवन तक ये सेलेब्स पहले थे इंजीनियर, फिर यू बन गए स्टार्स

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। हिंदी सिनेमा में आज के...