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Wednesday, March 4, 2026
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टीच फॉर इंडिया लीडर्स वीक में बोले नारायण मूर्ति, कहा-मेरी तरह बिल्कुल मत बनो

पैरिस में इंजीनियरिंग के जॉब के समय नारायण मूर्ति ने सीखा था कि सफलता का क्रेडिट हमेशा पूरी टीम को देना चाहिए और असफलता के लिए हमेशा खुद सामने आना चाहिए।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। टीच फॉर इंडिया लीडर्स वीक के दौरान एक 12 साल के बच्चे ने इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति से पूछा कि वो उनके जैसा कैसे बन सकता है तो इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि वो बच्चा उनसे बेहतर बनें। जिससे वो राष्ट्र के लिए और बेहतर कर सके।

पापा से सीखा अनुशासन में कैसे रहें

अनुशासन की महत्ता पर उन्होंने कहा कि उनके पिताजी ने उन्हें टाइमटेबल के जरिए टाइम का मैनेजमेंट करना सिखाया था। जिसने SSLC की परीक्षा में चौथी रैंक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पैरिस में जॉब के दौरान मिली यह सीख

पैरिस में अपने इंजानियरिंग के समय को याद करते हुए नारायण ने कहा, एक प्रोग्राम की मेमोरी टेस्ट करते हुए उन्होंने एक बार गलती से सिस्टम की मेमोरी इरेस कर दी थी और पूरा प्रोजेक्ट कोलैप्स हो गया। फिर उन्होंने उनके बॉस के साथ मिलकर 22 घंटों तक काम किया।

इसमें बॉस ने मेरे डेडिकेशन को सराहा पर अपने बलिदान के बारे में कुछ नहीं बताया। इससे उनको एक सीख मिली की असफलताओं की जिम्मेदारी हमेशा खुद लेनी चाहिए लेकिन जब सफलता की बात आए तो क्रेडिट पूरी टीम को देना चाहिए।

मां से सीखा निस्वार्थता क्या होती है

नारायण मूर्ति ने बताया कि अपने जीवन में निस्वार्थता अपनी मां से सीखी। नेशनल स्कॉलरशिप के दौरान उन्होंने अपनी मां का अनुरोध स्वीकार कर लिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि अपने नए कपड़े अपने बड़े भाई को दे दो। अगले दिन उन्होंने ऐसा ही किया और उन्हें एहसास हुआ कि दूसरों के लिए कुछ करने की अलग ही खुशी होती है। इस दौरान उन्होंने शेयरिंग इस केयरिंग की सीख मिली।

प्रधानाध्यापक ने सिखाया सबक

मूर्ति ने अपने SSLC के दिनों से एक सबक साझा किया जब उनके प्रधानाध्यापक, जो एक सख्त अनुशासनवादी थे, ने उन्हें सामुदायिक संसाधनों का मूल्य सिखाया था। “यह कॉमन साल्ट इस स्कूल में सभी का है, सिर्फ़ मेरा नहीं। हमें इसे सावधानी से संभालना चाहिए,” उनके प्रधानाध्यापक ने रसायन विज्ञान के एक प्रयोग के दौरान कहा था, यह ऐसा सिद्धांत था जिसे मूर्ति ने इंफोसिस में अपने दृष्टिकोण में अपनाया।

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