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Monday, March 2, 2026
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दुनिया में बजा भारत के UPI का डंका, IMF ने भी की तारीफ , कहा- फास्ट पेमेंट सिस्टम में बना ग्लोबल लीडर

भारत में UPI का चलन बढ़ता जा रहा है। लोग अब छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए नकद भुगतान की जगह UPI से पेंमेट करना पसंद कर रहे हैं। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी इसकी तारीफ की है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । आज देश में यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान इतना आम हो गया है कि लोग चाय का पेमेंट भी मोबाइल से करना पसंद करते हैं। भारत में डिजिटल लेन-देन के इस क्रांतिकारी बदलाव को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के यूपीआई सिस्टम की तारीफ की है। हालांकि, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के उपयोग में गिरावट आयी है। 

IMF की ताजा रिपोर्ट ‘बढ़ते खुदरा डिजिटल भुगतान: इंटरऑपरेबिलिटी का मूल्य’ में कहा गया है कि भारत का यूपीआई दुनिया के सबसे सफल और तेजी से बढ़ते रिटेल पेमेंट सिस्टम्स में शामिल है। 2016 में लॉन्च हुए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने कुछ ही वर्षों में नकद और कार्ड पेमेंट्स की जगह ले ली है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि यूपीआई के बढ़ते उपयोग के चलते डेबिट और क्रेडिट कार्ड जैसे पारंपरिक डिजिटल भुगतान माध्यमों की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है। यह सिस्टम भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित किया गया था और आज यह लाखों छोटे कारोबारियों से लेकर आम नागरिकों के रोजमर्रा के लेन-देन का हिस्सा बन चुका है।

हर महीने होते हैं 18 बिलियन से अधिक UPI ट्रांजेक्शन

भारत में डिजिटल भुगतान का चेहरा बन चुका यूपीआई अब हर महीने 18 बिलियन से भी ज्यादा लेनदेन का माध्यम बन चुका है। किसी भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिटेल पेमेंट सिस्टम की तुलना में यूपीआई का उपयोग सबसे अधिक किया जा रहा है। यह न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सबसे प्रभावी और लोकप्रिय तेज भुगतान प्रणाली बन चुकी है। 

IMF की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अब किसी भी अन्य देश की तुलना में तेज भुगतान प्रक्रिया अपनाने वाला देश बन चुका है। साथ ही, यूपीआई के बढ़ते उपयोग के चलते नकदी लेनदेन में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूपीआई एक इंटरऑपरेबल (अंतर-संचालनीय) प्लेटफॉर्म है, जो लेनदेन की मात्रा के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट पेमेंट प्रणाली बन चुका है। इसमें भारत के खुदरा भुगतान पर आधारित विस्तृत आंकड़ों और डेटा का विश्लेषण करते हुए ठोस प्रमाण भी पेश किए गए हैं।

2016 में लॉन्च के बाद UPI ने पकड़ी रफ्तार

IMF की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि “यूपीआई के 2016 में शुरू होने के बाद से इसमें तेजी से वृद्धि हुई है, जबकि नकदी के उपयोग में लगातार गिरावट देखी गई है। यूपीआई अब हर महीने 18 अरब से अधिक लेनदेन को संभव बनाता है और भारत में सभी इलेक्ट्रॉनिक खुदरा भुगतानों में सबसे आगे है।” यह रिपोर्ट IMF की ‘फिनटेक नोट्स’ श्रृंखला के अंतर्गत प्रकाशित हुई है, जो उसके सदस्य देशों के नीति-निर्माताओं को वित्तीय प्रौद्योगिकी से जुड़े अहम मुद्दों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन और सिफारिशें सामने लाती है।

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