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भारतीय मूल की ब्लड कैंसर सर्वाइवर ने अपने ब्लड स्टेम सेल डोनर से की वर्चुअल मुलाकात

बेंगलुरु, 4 फरवरी (आईएएनएस)। कुवैत की रहने वाली भारतीय मूल की ब्लड कैंसर पीड़िता पहली बार अपने ब्लड स्टेम सेल डोनर से वर्चुअली मिली, जिसने उन्हें दूसरा जीवन प्रदान किया है। कुवैत में एक नर्स के तौर पर कार्यरत 38 वषीर्या शीजा क्रॉनिक मायलॉइड ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं, जो एक प्रकार का ब्लड कैंसर है। जीवित रहने के लिए उन्हें ब्लड स्टेम सेल प्रत्यारोपण की आवश्यकता थी। बेंगलुरु के एक 34 वर्षीय वित्त पेशेवर (फाइनेंस प्रोफेशनल) सुनील नारायण ने 2018 में, गैर-लाभकारी संगठन डीकेएमएस बीएमएसटी फाउंडेशन इंडिया के साथ संभावित रक्त स्टेम सेल दाता के रूप में खुद को पंजीकृत किया था, जो रक्त कैंसर और रक्त विकारों के खिलाफ लड़ाई के लिए समर्पित है, जैसे कि थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया। उन्होंने अपना रक्त स्टेम सेल दान किया और शीजा को जीवन में दूसरा मौका दिया। सुनील ने कहा, जब मेरे पास फोन आया और बताया गया कि मेरा एक मरीज के लिए मैच (सैंपल का मिलान) हो गया है, तो मैं हैरान रह गया। मेरे छोटे से योगदान, जिसमें मेरे प्रयास में केवल कुछ घंटे लगे, ने मेरे प्राप्तकर्ता (मरीज) पर इतना बड़ा प्रभाव डाला। और. भले ही यह एक वर्चुअल (आभासी रूप से बातचीत) के माध्यम से था, मुझे उन्हें स्वस्थ और बेहतर देखकर बहुत गर्व महसूस हुआ। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि अधिक लोग संभावित जीवन रक्षक के रूप में पंजीकरण कराएंगे और ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों की मदद करेंगे। इस बीमारी और इसके बढ़ते बोझ के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में, हर साल एक लाख से अधिक लोगों को ब्लड कैंसर से पीड़ित पाया जाता है और यह बच्चों में कैंसर से संबंधित मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। शीजा का इलाज करने वाले सीएमसी वेल्लोर के हेमटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. बीजू जॉर्ज ने कहा, ज्यादातर लोग इस बात से अनजान हैं कि ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का इलाज किया जा सकता है और अक्सर, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट ही मरीज के जीवित रहने का एकमात्र मौका होता है। डीकेएमएस-बीएमएसटी जैसी स्टेम सेल के प्रयास स्वैच्छिक दाताओं को रजिस्टर करती हैं और शीजा जैसे हजारों रोगियों की मदद करती हैं, जिन्हें जीवन रक्षक स्टेम सेल प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। शीजा के पति जॉन ने कहा, जब शीजा को ब्लड कैंसर का पता चला तो हम असहाय महसूस कर रहे थे। मेरी पत्नी की जान बचाने के लिए सुनील के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। हम उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। 18-50 वर्ष के बीच के स्वस्थ व्यक्ति डीकेएमएस-बीएमएसटी डॉट ओआरजी/रजिस्टर पर ब्लड स्टेम सेल दाताओं के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं और मैच या मिलान होने वाले दाता की प्रतीक्षा कर रहे रोगियों को जीवन की एक आशा प्रदान कर सकते हैं। –आईएएनएस एकेके/एएनएम

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