नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कुछ दिन पहले अमेरिका के एक न्यायालय ने रिश्वत मामले में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी उनके भतीजे सागर अडानी सहित सात सहयोगियों पर न्याय विभाग द्वारा प्रतिभूति और वायर धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। न्याय विभाग के अभियोग पत्र में कहा गया कि प्रतिवादियों ने भारत में आकर्षक अक्षय ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की बात कही थी। अब इस मामले में बड़ा अपडेट आया है। भारत सरकार ने कहा है कि अमेरिका ने अभी तक उनसे इससे जुड़े किसी भी प्रकरण से संबंधित बातचीत के लिए कोई अनुरोध नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
अडानी प्रकरण निजी संस्थानों से जुड़ा, भारत सरकार नहीं है कानूनी तौर पर इसका हिस्सा
इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक आधिकारिक बयान के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि यह एक कानूनी मामला है जिसमें एक निजी कंपनी, एक व्यक्ति और अमेरिकी अदालतें शामिल हैं। ऐसे मामलों में नियमों के तहत प्रक्रियाएं और कानूनी रास्ते हैं और हमें यकीन है कि उनका पालन अमेरिका द्वारा किया जाएगा। भारत सरकार को इस मामले की पहले से जानकारी नहीं दी गई। हमने इस मामले में अमेरिकी सरकार से भी चर्चा नहीं की है। उन्होंने बताया है कि समन/गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए किसी विदेशी सरकार द्वारा किया गया कोई भी अनुरोध पारस्परिक कानूनी सहायता का हिस्सा है। ऐसे अनुरोधों की जांच योग्यता के आधार पर की जाती है। हमें इस संबंध में अमेरिका से कोई अनुरोध नहीं मिला है। यह मामला निजी संस्थानों से जुड़ा है और भारत सरकार फिलहाल किसी भी तरह से कानूनी तौर पर इसका हिस्सा नहीं है।
इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल का कहना यही था कि ऐसे मामलों में किसी भी देश को आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए भारत के गृह मंत्रालय को पूरी जानकारी देनी होती है। इसके बाद भारत का गृह मंत्रालय संबंधित एजेंसी के अधिकारियों के अनुरोध पर कार्रवाई शुरू करने का आदेश दे सकता है। अमेरिकी अदालत द्वारा गौतम अडानी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। हालांकि, अब ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में एक बार फिर बढ़त देखने को मिली है। दूसरी तरफ अडानी समूह ने अपने ऊपर लगे हुए आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि सभी आरोप निराधार हैं वे लगाए गए सभी आरोपों का पूरी दृढ़ता से कानूनी तरीके से मुकाबला करेंगे।





