हैदराबाद, रफ्तार डेस्क । गौतम अडानी की कंपनी पर अनुबंध हासिल करने के लिए कथित रिश्वतखोरी के लगे अमेरिकी आरोपों के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू एक बड़ा निर्णय करने जा रहे हैं। वे अपनी आंध्र प्रदेश सरकार और अडानी ग्रीन एनर्जी के साथ बिजली आपूर्ति अनुबंध को बरकरार रखने के लिए जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें सबसे अहम है अडानी ग्रुप के साथ छोड़ देना। अप्रत्यक्ष रूप से ही सही पर यह पहली बार है कि टीडीपी सरकार के सामने भ्रष्टाचार का कोई घोटाला सामने आया है, जिसका सीधा संबंध YSRCP प्रमुख वाईएस जगनमोहन रेड्डी से जोड़ा गया है।
इसलिए नायडू के सहयोगियों को लगता है कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू इस मौके को न गवाएं, इस अवसर को चूकना मूर्खता होगी। क्योंकि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्रमुख सहयोगी टीडीपी विपक्ष को राज्य में कोई खेल खेलने का अवसर देना नहीं चाहती है। विशेषकर जब संसद सत्र चल रहा हो।
आंध्र सरकार लिखेगी सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को पत्र
राज्य सरकार में विश्वसनीयता के आधार पर यह जानकारी प्राप्त हुई है कि आंध्र प्रदेश अडानी ग्रीन एनर्जी के साथ हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौते को रद्द करने और केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच की सिफारिश करने के लिए सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को पत्र लिखने पर विचार कर रहा है। नायडू सरकार अन्य जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है उनमें रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच के लिए कैबिनेट उप-समिति का गठन और एसईसीआई के साथ बिजली आपूर्ति समझौते को निलंबित करना शामिल है। तीसरा विकल्प पीएसए को पूरी तरह खत्म करना है।
राज्य सरकार ने एसईसीआई को पत्र लिखकर PPA रद्द करने को कह दिया है। जांच के तहत पीपीए में SECI के माध्यम से आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 7000 मेगावाट सौर ऊर्जा की खरीद शामिल है।
अधिकारियों को 265 मिलियन रुपये की रिश्वत देने का है आरोप
गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारियों ने गौतम अडानी और सात अन्य पर 2021 और 2022 के बीच ओडिशा, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए सौर ऊर्जा आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए अज्ञात राज्य सरकार के अधिकारियों को 265 मिलियन रुपये की रिश्वत देने का आरोप लगाया है। रिश्वत कांड के केंद्र में दो कंपनियां अदानी ग्रीन और एज़्योर पावर हैं, जिन्हें जून 2020 में पुरस्कार पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने एसईसीआई के साथ एक पीपीए पर हस्ताक्षर किए थे।
हालाँकि, SECI को दोनों कंपनियों से बिजली खरीदने के लिए कोई डिस्कॉम नहीं मिली क्योंकि कीमतें बहुत अधिक थीं। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इसके बाद, अधिकारियों को रिश्वत दी गई और वे राज्य डिस्कॉम बिजली खरीदने के लिए सहमत हुए और SECI के साथ एक PSA पर हस्ताक्षर किए गए थे ।




