नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजधानी में बीते महीने हुई मूसलधार बारिश ने एक नौकरी के इंटरव्यू को न केवल चर्चा में ला दिया, बल्कि एचआर को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मामला एक प्राइवेट कंपनी का है, जहां इंटरव्यू देने पहुंचे एक युवक ने अपनी मांग से एचआर को चौंका दिया। एक युवक ने एचआर के सामने ऐसी मांग रख दी कि सुनकर हर कोई दंग रह गया। आमतौर पर इंटरव्यू में सैलरी, छुट्टियां और प्रमोशन की बात होती है, लेकिन यहां मामला कुछ अलग ही था। युवक ने कहा, “सर, मुझे रेन अलाउंस चाहिए” यानी बारिश के दिनों में ऑफिस आने-जाने के लिए एक्स्ट्रा पैसे।
जानकारी के मुताबिक, एचआर को शुरुआत में यह लगा कि उम्मीदवार नौकरी को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं है। इसी के चलते उन्होंने सीधा सवाल पूछ लिया”क्या आप वाकई इस नौकरी के लिए गंभीर हैं? इस पर उम्मीदवार ने तपाक से जवाब दिया “मैं बिल्कुल गंभीर हूं, लेकिन इस समय मेरी एक समस्या है।
उम्मीदवार ने पेश की बारिश की ‘प्रूफ’ वाली कहानी
उम्मीदवार ने बताया कि जुलाई में हुई भारी बारिश के कारण उसका रोज़ का आने-जाने का किराया दोगुना हो गया है। उसने यह भी कहा कि उसे थोड़ा भत्ता चाहिए, ताकि वह इस खर्च को मैनेज कर सके।यही नहीं, उसने एचआर से यह भी कहा, “आप चाहें तो खुद हिसाब लगा लीजिए, मेरे आने-जाने का खर्च सच में दोगुना हो गया है।
HR ने जोड़ा हिसाब, माथा पकड़ लिया!
उम्मीदवार की बात सुनकर एचआर ने जब खुद अपना जुलाई का खर्च देखा, तो उनके भी होश उड़ गए। उन्होंने लिखा,जुलाई में केवल 15 दिनों में ही मैंने पूरा महीने भर का यात्रा खर्च कर डाला। सुबह राइड बुक की, तो किराया सामान्य से 20 रुपये ज्यादा था।और इसकी वजह है बीती रात दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश। इस अनोखी मांग को लेकर दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी की एचआर ने अपना अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर साझा किया। उसने बताया, “कैंडिडेट से जब उसकी अपेक्षाओं के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि उसे मानसून सीजन में रेन अलाउंस दिया जाए। पहले तो मुझे लगा कि वह मज़ाक कर रहा है, लेकिन फिर उसने बड़ी गंभीरता से इसका कारण बताया।
मांग निकली जायज़, सोच बदल गई
जब बात समझ आई, तो एचआर ने भी उम्मीदवार की मांग को जायज ठहराया। उन्होंने माना कि कभी-कभी बाहरी हालात भी किसी के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। अब यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है। कई लोग इसे ‘ह्यूमन रिसोर्सेस’ में संवेदनशीलता की मिसाल बता रहे हैं।
कैब की कीमतों से हुआ परेशान, पेश किया खर्च का हिसाब
कैंडिडेट ने बताया कि जुलाई में भारी बारिश के चलते ओला और उबर जैसी कैब सेवाओं का किराया दोगुना हो गया है, जिससे उसका मासिक बजट बिगड़ गया। उसने HR को बाकायदा हिसाब लगाकर दिखाया कि 15 दिन में ही उसका ट्रैवल बजट खत्म हो गया।
घर से काम या देर से आने का विकल्प भी सुझाया
युवक ने कहा कि अगर कंपनी अतिरिक्त भत्ता नहीं दे सकती तो कम से कम बारिश वाले दिनों में वर्क फ्रॉम होम या फ्लेक्सी टाइमिंग की सुविधा दे दे। जिसे HR ने माना कि उसके तर्कों में दम है और ये सिर्फ शौक नहीं, एक वास्तविक परेशानी है।
HR ने भी माना, “मांग अजीब थी, पर जायज भी”
पोस्ट में HR ने लिखा, शुरुआत में मैं उलझन में पड़ गई थी, लेकिन जब उसने डेटा के साथ अपनी बात समझाई, तो मुझे भी लगा कि यह डिमांड बेबुनियाद नहीं थी।
क्या अब कंपनियों को ‘रेन अलाउंस’ देना चाहिए?
यह मामला भले ही वायरल हो गया हो, लेकिन एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या मेट्रो शहरों में मानसून जैसी परिस्थितियों के लिए कर्मचारियों को कुछ अतिरिक्त सहूलियतें दी जानी चाहिए? शायद आने वाले समय में कंपनियों को सिचुएशनल अलाउंसेज़ पर विचार करना पड़े।
जहां एक तरफ यह मामला लोगों को हँसी में डाल रहा है, वहीं दूसरी ओर यह शहरी जीवन की असल परेशानियों को उजागर करता है। सोचने वाली बात है कि जब ट्रैफिक, जलभराव और महंगे किराए वाकई दिक्कत बन जाएं, तो ‘बारिश भत्ता’ भी अब मज़ाक नहीं रह जाता।





