नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) अपनी सिक्योरिटी और फिक्स्ड रिटर्न के लिए भारत में इंवेस्ट करने का एक पसंदीदा तरीका है। इसकी खास वजह रिस्क फ्री और फिक्स रिटर्न है। इसे लेकर बड़े से छोटे तक के तमाम निवेशक पैसा लगाते है। हालांकि, एफडी तोड़ने की नौबत कभी भी आ सकती है। इस दौरान इवेस्टर को मैच्योरिटी से पहले ही FD को तोड़ने की मजबूरी आ जाती है। मैच्योरिटी से पहले FD तोड़ने पर बैंक कम रिटर्न और पेनल्टी लगाते है। ऐसे में आप इन सिचुएवेशन से बच सकते हैं। हम आपको कुछ ट्रिक बातने जा रहे है जिसे आप फॉलो कर इस चीजों से बच सकते हैं।
FD लैडरिंग का करें इस्तेमाल
मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ने पर कम रिटर्न मिलता है और बैंक पेनाल्टी लगाता है। ऐसे में इससे बचने के लिए आप एफडी लैडरिंग का इस्तेमाल करें। इसमें पूरा पैसा एक ही एफडी में निवेश नहीं करें। पैसा को अलग-अलग किस्तों में अलग-अलग तारीखों के साथ कई FD में विभाजित कर निवेश करें। ऐसे में आपको एफडी मैच्योरिटी से पहले तोड़ने की आश्वकता नहीं पड़ेगी।
स्वीप-इन सुविधा
कई बैंक स्वीप-इन अकाउंट की सुविधा मुहैया कराते है, जहां एक तय रकम सेविंग्स खातों में होने पर वह ऑटोमेटिक्स से FD में चली जाती है। ऐसा होने की वजह से एफडी में जमा राशि पर ज्यादा ब्याज मिलता है। साथ ही जब भी पैसे की आवश्यकता पड़ती है, निकालने में भी आसानी होती है।
FD पर लोन
कई निवेश FD को मैच्योरिटी से पहले तोड़ देते है। लेकिन मैच्योरिटी से पहले तोड़ने के बजाय, आप लोन भी ले सकते हैं, लोन लेना भी एक बेहतर विकल्प है। बैंक आमतौर पर FD राशि के 90 प्रतिशत तक लोन FD की ब्याज दर से थोड़ी अधिक ब्याज दरों पर देते हैं।
सरकारी बैंक में करें FD
अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसे निकालने की जरुरत है तो आप अपनी एफडी सरकारी बैंकों में कराएं। समय से पहले FD तोड़ने के मामले में सरकारी बैंक आमतौर पर निजी बैंक के मुकाबले कम पेनल्टी लगाते हैं। सरकारी बैंकों में, जुर्माना आम तौर पर 0.50 प्रतिशत से 1 प्रतिशत के बीच होता है। वहीं, प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में यह 1 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत के बीच हो जाता है। ऐसे में सरकारी बैंकों पर एफडी कराने का एक अलग फायदा होता है।




