नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बैंक में जमा पैसे की सुरक्षा को लेकर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है। वर्तमान में बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा 5 लाख रुपये है, लेकिन इसे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। अगर सरकार यह निर्णय लेती है तो इससे करोड़ों बैंक ग्राहकों को राहत मिलेगी।
क्या है डिपॉजिट इंश्योरेंस?
अगर किसी बैंक का दिवाला निकल जाता है तो डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा करता है। यह संस्था हर बैंक जमाकर्ता को 5 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा प्रदान करती है, जो मूलधन और ब्याज दोनों पर लागू होता है। यह बीमा बैंकों से प्रीमियम लेकर ग्राहकों के जमा धन को सुरक्षा कवरेज देता है। 2020 में PMC बैंक घोटाले के बाद सरकार ने डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी थी। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नगराजू ने हाल ही में कहा कि डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि सरकार से मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
आरबीआई भी चाहता है बीमा सीमा बढ़े
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने 19 अगस्त 2024 को कहा था कि जमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर जमा बीमा की सीमा बढ़ाना आवश्यक है। बढ़ती जमा राशि, महंगाई और आय स्तर को देखते हुए यह जरूरी कदम बताया गया। न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले के बाद को-ऑपरेटिव बैंकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस पर आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने कहा कि सिर्फ एक बैंक में घोटाला होने से पूरे को-ऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर पर शक करना सही नहीं होगा। उन्होंने बताया कि को-ऑपरेटिव बैंक आरबीआई की सख्त निगरानी में काम कर रहे हैं।
ग्राहकों को मिलेगा फायदा
अगर सरकार डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा बढ़ाने का फैसला लेती है, तो इससे देशभर के बैंक खाताधारकों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे बैंकों में जमा धन की सुरक्षा बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास मजबूत होगा। अब सभी की नजरें सरकार के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।





