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Monday, March 16, 2026
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31 दिसंबर से क्यों हड़ताल पर जा रहे हैं गिग वर्कर्स? जानिए Swiggy-Zomato से लेकर Amazon तक पर क्या पड़ेगा असर

अमेजन, स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, फ्लिपकार्ट और जैप्टो जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर 2025 से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेजन, स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, फ्लिपकार्ट और जैप्टो जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर 2025 से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। गिग वर्कर्स का कहना है कि समय के साथ उनकी कमाई घटती जा रही है, जबकि कंपनियों का मुनाफा लगातार बढ़ रहा है। इसी असंतोष के चलते उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है।

यूनियनों के बैनर तले होगा आंदोलन

यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के नेतृत्व में हो रही है। यूनियनों का दावा है कि इसमें मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर-2 शहरों के हजारों गिग वर्कर्स भी शामिल होंगे, जिससे डिलीवरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

ऐप और एल्गोरिदम से नियंत्रण पर नाराजगी

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी चिंता ऐप-आधारित नियंत्रण प्रणाली को लेकर है। उनका कहना है कि भुगतान, इंसेंटिव और डिलीवरी टारगेट पूरी तरह एल्गोरिदम से तय होते हैं, जिनमें पारदर्शिता नहीं होती। वर्कर्स को यह भी नहीं पता होता कि उनकी कमाई कब और क्यों घटा दी जाती है। वर्कर्स का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान होने वाले सड़क हादसों और अन्य जोखिमों की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है, लेकिन कंपनियां समय-सीमा बेहद सख्त रखती हैं। देर होने पर जुर्माना या इंसेंटिव में कटौती कर दी जाती है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ता है।

इंसेंटिव सिस्टम से आय अस्थिर

यूनियनों का कहना है कि इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बार-बार बदलाव किए जाते हैं, जिससे गिग वर्कर्स की आय स्थिर नहीं रह पाती। कई बार ज्यादा काम करने के बावजूद अपेक्षित भुगतान नहीं मिलता, जिससे आर्थिक असुरक्षा बढ़ रही है। गिग वर्कर्स ने बेहतर कामकाजी हालात, उचित भुगतान, सुरक्षित डिलीवरी टाइम और सामाजिक सुरक्षा की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर गंभीरता से बातचीत नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अगर हड़ताल लंबी चली, तो नए साल से पहले और बाद में ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। गिग वर्कर्स का साफ कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की भी है।

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