नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने 7 करोड़ से अधिक खाताधारकों को बड़ी राहत दी है। संगठन ने पीएफ खाते से निकासी के नियमों में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि सदस्य अब तय न्यूनतम बैलेंस को छोड़कर खाते में जमा पूरी राशि निकाल सकेंगे। केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने इस नए नियम को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही EPFO ने पीएफ निकासी प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए कई अहम फैसले भी लिए हैं, जिससे कर्मचारियों को अपना पैसा निकालने में अब दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अब PF खाते से निकाल सकेंगे 75% रकम
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया कि अब सदस्य अपने पीएफ खाते में जमा कुल राशि का 75% तक निकाल सकेंगे, जबकि 25% न्यूनतम बैलेंस के रूप में खाते में बनाए रखना होगा। इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी और ईपीएफओ आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति भी शामिल रहे। EPFO ने कहा है कि इस बदलाव से कर्मचारी जरूरत पड़ने पर पीएफ खाते में मिनिमम बैलेंस को छोड़कर पात्र शेष फंड आसानी से निकाल सकेंगे।
पहले सिर्फ इन मामलों में मिलती थी PF की पूरी निकासी की सुविधा
अब तक पीएफ निकासी की सुविधा सीमित परिस्थितियों में ही उपलब्ध थी। पुराने नियमों के तहत, कर्मचारी केवल बेरोजगारी या रिटायरमेंट की स्थिति में ही अपने खाते से पूरी राशि निकाल सकते थे। बेरोजगार होने के एक महीने बाद सदस्य अपने पीएफ खाते में जमा राशि का 75% निकाल सकता था, जबकि शेष 25% रकम की निकासी दो महीने बाद की अनुमति होती थी। वहीं, रिटायरमेंट की स्थिति में पूरी जमा राशि एक साथ निकालने की सुविधा दी गई थी।
नए नियम से दोहरा फायदा
सीबीटी की बैठक में लिए गए इस अहम फैसले को लेकर श्रम मंत्रालय ने कहा कि नए नियम के तहत सदस्य अपने पीएफ खाते में 25% राशि न्यूनतम बैलेंस के रूप में बनाए रखते हुए 75% रकम तक निकाल सकेंगे। मंत्रालय के अनुसार, इस नियम से खाताधारकों को दोहरा फायदा मिलेगा। एक ओर उन्हें जरूरत के समय नकदी की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर खाते में बची राशि पर 8.25% सालाना ब्याज मिलता रहेगा। इसके अलावा, न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने से सदस्य का रिटायरमेंट फंड भी लगातार बढ़ता रहेगा।
शिक्षा और शादी के लिए PF निकासी के नियमों में ढील
बैठक में EPFO ने कई और बड़े फैसले लिए हैं, जिनसे कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। अब शिक्षा के लिए 10 बार तक और शादी के लिए 5 बार तक आंशिक निकासी की अनुमति दी गई है। पहले यह सीमा सिर्फ तीन बार तक सीमित थी, जिसे हटाकर सदस्यों को अधिक राहत दी गई है। इसके अलावा, ईपीएफओ ने आंशिक निकासी के लिए सर्विस टेन्योर लिमिट को सभी मामलों में एकसमान कर दिया है। अब किसी भी कारण से आंशिक निकासी करने के लिए सदस्य को कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करनी होगी। माना जा रहा है कि यह बदलाव विशेष रूप से नए कर्मचारियों के लिए लाभदायक साबित होगा।
अब PF निकासी में नहीं बताना होगा कारण
ईपीएफओ ने सदस्यों की सुविधा के लिए दावा निपटान प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। अब तक विशेष परिस्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा या महामारी के दौरान फंड निकालने के लिए कारण बताना अनिवार्य होता था, जिसके चलते कई दावे खारिज भी हो जाते थे। लेकिन नए नियम के तहत, ऐसी परिस्थितियों में अब सदस्यों को किसी भी प्रकार का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होगी। श्रम मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि अब इन मामलों में दस्तावेजों की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इससे आंशिक निकासी के दावों का 100% ऑटोमैटिक निपटान संभव होगा और मेंबर्स को पैसा निकालने में पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी होगी।





