सोनीपत, 30 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के विशिष्ट विजिटिंग स्कॉलर डॉ अजय छिब्बर ने जिंदल स्कूल ऑफ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी (जेएसजीपी), ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) में 100 साल में भारत एक समृद्ध और खुशहाल राष्ट्र पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार और जिंदल स्कूल ऑफ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी के डीन प्रोफेसर आर. सुदर्शन ने विश्वविद्यालय परिसर में डॉ छिब्बर के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की। यह परिसर कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद खुला है। डॉ छिब्बर ने सलमान अनीज सोज के साथ अनशैकलिंग इंडिया: हार्ड ट्रूथ्स एंड क्लियर चॉइस फॉर रिवाइवल भी लिखी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को समावेशी और निरंतर विकास के साथ सतत संपन्नता हासिल करने की जरूरत है ताकि इससे आय, लिंग, जाति या धर्म से संबंधित असमानताओं को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत को खुद को वास्तव में धर्मनिरपेक्ष और रक्षक समाज के रूप ढलना होगा ताकि यह देश लोगों का हो न कि यह एक ऐसा देश बने जो नवाचार, सरलता और पहल को रोकता हो। डॉ छिब्बर ने अपने व्याख्यान में भारत की समृद्धि और विकास में बाधक बनने वाली छह चुनौतियों का समाधान प्रस्तावित किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले भारत को सरकार के दायरे और पहुंच को कम करके अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत है। भारत को बहुत अधिक करने की कोशिश करने और बहुत कुछ करने से खुद को मुक्त करके की जरूरत है। उन्होंने कहा,मेरी राय में सरकार को ऐसा करने की बेहद जरूरत है। डॉ छिब्बर ने कहा कि दूसरी बाधा स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा और लैंगिक असमानता से संबंधित मुद्दों पर परस्पर निर्भरता है। उन्होंने कहा, भारत को विश्व स्तरीय विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों का भी निर्माण करना चाहिये, निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता और भागीदारी की अनुमति देनी चाहिये। निजी क्षेत्र के समर्थन के लिये सार्वजनिक धन का उपयोग करना चाहिये न कि उन्हें हटाना चाहिये। तीसरी बाधा यह है कि पुरुष-महिला लिंगानुपात में गिरावट जारी है, कन्या भ्रूण हत्या की संख्या में वृद्धि हो रही है विशेषकर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में। उन्होंने कहा, भारत को यह सुनिश्चित करने के लिये नये सिरे से प्रयास करने चाहिये कि महिलाओं का आर्थिक, कानूनी और राजनीतिक शोषण समाप्त हो। चौथा, भारत की अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी विकास और रोजगार सृजन के लिये फिर से तैयार किया जाना चाहिये। पांचवां, भारत को आबादी का लाभ प्राप्त करने के लिये अगली पीढ़ी के सुधारों का अनुसरण करना चाहिये। शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के मुद्दों पर नीतिगत रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ छिब्बर ने कहा कि छठा उपाय यह है कि भारत के राजनीतिक वर्ग को अपने लक्ष्य को व्यापक बनाना चाहिये। उन्होंने कहा, एक समूह या धर्म को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करके और समाज में विभाजन पैदा करके संकीर्ण राजनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिये संस्थानों को कमजोर करने के बजाय आने वाली पीढ़ियों के लिये बेहतर भविष्य का वादा करते हुये और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को हल करने के लिये भारत को बाकी दुनिया के साथ हाथ मिलाना चाहिये। उन्होंने कहा कि अपने रास्ते में बदलाव लाकर जब अगले 25 वर्षों में स्वतंत्रता का 100 वर्ष मनाया जायेगा तो निश्चित रूप से यह देश को 21 वीं सदी की आर्थिक शक्ति और एक अधिक खुशहाल देश के रूप में स्थापित करेगा, जिसके सभी भारतीय हकदार हैं। –आईएएनएस एकेएस/एएनएम




