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राज्यसभा में चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट एंड वर्क्‍स अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी (संशोधन) विधेयक पारित

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। राज्यसभा में मंगलवार को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरीज (संशोधन) विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। उच्च सदन में भी इस विधेयक के पारित होने के साथ, अब इसे संसद की अंतिम स्वीकृति मिल गई है, क्योंकि इसे 30 मार्च को लोकसभा द्वारा पहले ही पारित कर दिया गया था। विधेयक या बिल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्ट, 1949, कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स एक्ट, 1959 और कंपनी सेक्रेटरीज एक्ट, 1980 में संशोधन करने के उद्देश्य से लाया गया था। विधेयक इन अधिनियमों के तहत अनुशासनात्मक तंत्र को मजबूत करने और आईसीएआई, आईसीडब्ल्यूएआई और आईसीएसआई संस्थान के सदस्यों के खिलाफ मामलों के समयबद्ध निपटान का प्रावधान करता है। इस विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस संशोधन से इन निकायों की स्वायत्तता में कोई बदलाव नहीं होगा और इससे वित्तीय विवरणों की ऑडिटिंग में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा, यह विधायी विभागों के विस्तृत परामर्श के बाद लाया गया है, जिन्होंने हमें इन तीन अधिनियमों के लिए एक संशोधन लाने की सलाह दी थी क्योंकि विधेयक के उद्देश्य समान थे। सीतारमण ने कहा, 2017 में गठित मीनाक्षी दत्ता घोष समिति की सिफारिश के बाद सरकार यह विधेयक लाई है और ये सिफारिशें वित्त मंत्रालय द्वारा अध्ययन की गई थीं। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरीज जैसे संस्थानों के कामकाज में सुधार के लिए लाए गए एक महत्वपूर्ण विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने पर वित्त मंत्री सीतारमण ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि इन सुधारों से तीनों संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इन तीनों संस्थानों के संचालन के संबंध में एक विधान लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और वे पृथक कानूनों के तहत कामकाज करते रहेंगे। सीतारमण ने कहा कि ये संस्थान पहले की तरह काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अपेक्षित स्तर की जवाबदेही और अधिक पारदर्शिता लाएगा। इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस विधायक एल. हनुमंतैया ने कहा कि इस विधेयक में अनुशासनात्मक समिति के पीठासीन अधिकारी के रूप में गैर चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए प्रावधान किया गया है, जिससे समिति के पेशेवर कार्य में बाधा आ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन संस्थानों की स्वायत्तता को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा सांसद सुरेश प्रभु ने कहा कि यह कानून देश के आर्थिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विधेयक पर बोलते हुए, डीएमके सांसद पी. विल्सन ने यह भी कहा कि इससे इन निकायों पर नौकरशाही नियंत्रण का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने सरकार से इन निकायों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए कहा। तृणमूल कांग्रेस की सदस्य मौसम नूर, बीजू जनता दल के सुजीत कुमार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी सांसद जॉन ब्रिटास ने भी बहस में भाग लिया। –आईएएनएस एकेके/एएनएम

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