नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) में 15 साल बाद अहम बदलाव किया है। इस परिवर्तन के तहत पुराने पैकेज रेट्स को संशोधित किया गया है। सरकार के इस कदम से करीब 46 लाख CGHS लाभार्थियों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
CGHS में नई दरें लागू, अब कैशलेस इलाज होगा आसान
सरकार ने CGHS के तहत 2,000 मेडिकल पैकेज की नई दरें जारी की हैं, जो 13 अक्टूबर से लागू होंगी। यह बदलाव लंबे समय से की जा रही उन शिकायतों के बाद आया है, जिनमें लाभार्थियों ने अस्पतालों में कैशलेस ट्रीटमेंट न मिलने की बात कही थी। मरीजों को अब तक इलाज के लिए खुद की जेब से खर्च उठाना पड़ता था और फिर रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था।
निजी अस्पतालों की ओर से भी लगातार यह मांग उठ रही थी कि मौजूदा पैकेज दरें काफी पुरानी हो चुकी हैं और वे आज के मेडिकल खर्चों के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं। अब नए पैकेज रेट्स के लागू होने से कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा बेहतर होगी और मरीजों को इलाज के लिए पहले से भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नई दरें अस्पताल की क्वॉलिटी, शहर की कैटेगरी, अस्पताल के प्रकार और मरीज के वार्ड के आधार पर तय की जाएंगी।
2014 के बाद पहली बार CGHS में बड़ा सुधार
CGHS के पैकेज रेट्स में आखिरी बड़ा बदलाव 2014 में किया गया था। इसके बाद करीब 10 वर्षों तक केवल मामूली बदलाव होते रहे, लेकिन कोई व्यापक सुधार लागू नहीं हुआ। इस साल अगस्त 2025 में, सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज यूनियन (GENC) ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि कैशलेस इलाज की कमी से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, खासकर आपात चिकित्सा स्थितियों में।
इसके बाद सरकार ने 2000 मेडिकल पैकेज की दरों में संशोधन का बड़ा फैसला लिया। यह कोई एक सिंगल पैकेज नहीं, बल्कि CGHS के अंतर्गत आने वाले करीब 2000 अलग-अलग प्रकार के मेडिकल ट्रीटमेंट को कवर करता है। पुराने पैकेज रेट्स वर्तमान इलाज की लागत के अनुरूप नहीं थे, जिससे निजी अस्पताल कैशलेस इलाज देने से बचते रहे। अब संशोधित दरों के लागू होने से यह बाधा दूर होने की उम्मीद है, जिससे लाभार्थियों को बेहतर और बिना अग्रिम भुगतान के इलाज मिल सकेगा।
CGHS पैकेज में क्या हुआ बदलाव ?
सरकार द्वारा लागू की गई 2,000 मेडिकल पैकेज की नई दरें अब शहर की श्रेणी (टियर-I, टियर-II, टियर-III) और अस्पतालों की गुणवत्ता जैसे NABH एक्रेडिटेशन पर आधारित होंगी।
– टियर-II शहरों में CGHS पैकेज रेट्स बेस रेट से 19% कम होंगी।
– टियर-III शहरों के लिए ये दरें बेस रेट से 20% कम तय की गई हैं।
– जो अस्पताल NABH से एक्रेडिटेड हैं, वे बेस रेट पर सेवाएं देंगे।
– नॉन-NABH अस्पतालों को बेस रेट से 15% कम भुगतान मिलेगा।
– वहीं, 200 से अधिक बेड वाले सुपर-स्पेशियल्टी अस्पतालों को बेस रेट से 15% ज्यादा भुगतान मिलेगा।





