नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सरकार आगामी बजट में निर्यातकों और छोटे कारोबारियों को लोन समेत वित्तीय सहायता बढ़ाने के लिए पैकेज की घोषणा कर सकती है। वाणिज्य विभाग पहले ही निर्यातकों के लिए पर्याप्त ऋण प्रवाह तथा फैक्टरिंग एवं लोन गारंटी जैसे अन्य साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर चुका है। वास्तव में, विभाग ने मुद्दों को विस्तार से समझने के लिए एक परामर्शदाता फर्म को नियुक्त किया था और नॉर्थ ब्लॉक ने उसे कुछ सिफारिशों का दोबारा मूल्यांकन करने के लिए कहा था। निर्यातकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम व्यवसायों के लिए एक विकल्प बिना जमानत के लोन का है।
पूंजी प्राप्त करने में कठिनाई होती है
छोटे व्यवसायों को, जिनमें से अधिकांश पारिवारिक स्वामित्व वाले उद्यम होते हैं, अक्सर पूंजी प्राप्त करने में कठिनाई होती है। निर्यातकों ने शिकायत की है कि बैंकों द्वारा संपार्श्विक पर जोर दिए जाने के कारण रियल लोन का प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोविड के बाद, बैंकों द्वारा दिए जाने वाले गारंटी-आधारित लोनों को व्यवसायों के लिए उचित दरों पर पूंजी प्राप्त करने में एक बड़ी मदद के रूप में देखा गया, जबकि बैंक बड़े खराब ऋणों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से ऋण देते हैं।
प्रमुख रोजगार सृजनकर्ता हो सकते हैं
निर्यातकों के लिए, ब्याज इक्युलाइजेशन योजना, जो महीनों से वित्त मंत्रालय के पास लंबित है, को भी हरी झंडी मिल सकती है, जिससे भारतीय व्यापारियों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी, क्योंकि हाई इंटरेस्ट बर्डन और रसद लागत दो प्रमुख बाधाएं मानी जाती हैं। इन दोनों के हटने से उन्हें राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि छोटे व्यवसाय और निर्यातक, विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र में शामिल, प्रमुख रोजगार सृजनकर्ता हो सकते हैं तथा समग्र आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा दे सकते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें उन चुनौतियों से उबरने में मदद करना है जिनका वे सामना कर रहे हैं। वित्त ही मुख्य बात है। RBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए जाने वाले लोन में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि मध्यम साइज के व्यवसायों को दिए जाने वाले ऋण में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ओवरऑल लोन वृद्धि बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गई है।





