नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बीते 6 महीने से पेट्रोल डीजल के दाम में कोई गिरावट नहीं आई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द पेट्रोल डीजल के दामों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ब्रेंट फ्यूचर्स का 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना, सरकारी तेल कंपनियों का मुनाफे में रहना और जम्मू कश्मीर के आगामी चुनाव, ये वो संभव कारण हैं जिनके चलते ये गिरावट देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल के दाम में कमी
रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के समय कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे। उस समय कच्चे तेल के दाम 130 डॉलर प्रति बैरल के अधिकतम स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि तुलनात्मक तौर पर देखें तो ये दाम गिरकर लगभग आधे हो गए हैं। ब्रेंट क्रूड नवंबर वायदा के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें 69.58 डॉलर प्रति बैरल हो गई जबकि WTI क्रूड अक्टूबर वायदा 66.18 डॉलर प्रति बैरल हो गई। ये पहला कारण है जो पेट्रोल डीजल के दामों में गिरावट के संकेत देता है।
सरकारी तेल कंपनियों को हो रहा है तगड़े मुनाफा
कच्चे तेल की कीमतें कम होने और पेट्रोल डीजल की खपत बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियां अच्छे खासे मुनाफे में हैं। इन कम्पनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल है। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले क्वार्टर में इन कंपनियों का संयुक्त मुनाफा 7,371 करोड़ रूपए रहा। जबकि GRMs और LPG के मोर्चे पर कुछ खास अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा।
जम्मू कश्मीर चुनाव भी बन सकते हैं दामों में कटौती की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल को पर नहीं करती हैं तो संभव है कि OMCs की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा जिसके चलते पेट्रोल डीजल के मोर्चे पर आम आदमी को राहत मिल सकती है। पिछले रिकॉर्ड को देखें तो लोकसभा चुनाव से पहले मार्च महीने में भी कटौती देखने को मिली थी। यही पैटर्न जम्मू कश्मीर चुनाव के मद्देनजर भी देखा जा सकता है।




