नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आजकल हर हफ्ते नया स्मार्टफोन लॉन्च हो रहा है। शानदार कैमरा, दमदार प्रोसेसर और प्रीमियम डिजाइन देखकर किसी का भी मन ललचा जाए। ऊपर से No Cost EMI और Zero Down Payment जैसे ऑफर ऐसा भ्रम पैदा करते हैं कि महंगा फोन भी सस्ता लगने लगता है। नतीजा यह कि ₹25,000 कमाने वाला व्यक्ति भी ₹1 लाख का फोन खरीद लेता है और फिर महीनों तक EMI के बोझ में दबा रहता है। अगर आप इस फाइनेंशियल जाल से बचना चाहते हैं, तो फोन खरीदने से पहले 2-6-10 रूल जरूर समझ लें।
क्या है 2-6-10 रूल?
यह एक सिंपल फाइनेंशियल फॉर्मूला है, जो बताता है कि फोन की कीमत, EMI की अवधि और मासिक किस्त आपकी सैलरी के हिसाब से कितनी होनी चाहिए, ताकि आप कर्ज और तनाव से दूर रहें।
1. ‘2’ का नियम: फोन की कीमत की लिमिट
फोन की कुल कीमत आपकी महीने की सैलरी के आधे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर आपकी सैलरी ₹50,000 है, तो फोन का बजट अधिकतम ₹25,000 होना चाहिए। याद रखें, स्मार्टफोन कोई निवेश नहीं है। बॉक्स खुलते ही इसकी वैल्यू 20% तक गिर जाती है। एक या दो महीने की पूरी सैलरी फोन पर खर्च करना फाइनेंशियल गलती हो सकती है।
2. ‘6’ का नियम: EMI की मियाद
आजकल कंपनियां 18 या 24 महीने की EMI का लालच देती हैं ताकि किस्त छोटी लगे। लेकिन सच्चाई यह है कि फोन की EMI 6 महीने से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अक्सर लोग दो साल की EMI भरते रहते हैं, जबकि एक साल में ही फोन पुराना या खराब लगने लगता है। 6 महीने में EMI खत्म करने का मतलब है जल्दी कर्ज-मुक्त होना।
3. ‘10’ का नियम: EMI का बजट
फोन की EMI आपकी मासिक इनकम के 10% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
अगर आपकी इन-हैंड सैलरी ₹40,000 है, तो EMI ₹4,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। किराया, राशन, बिजली बिल और अन्य खर्चों के बीच भारी EMI आपका पूरा बजट बिगाड़ सकती है।
फोन खरीदने से पहले खुद से पूछें ये 3 सवाल
नया फोन लेने से पहले एक पल रुककर खुद से ईमानदारी से पूछें कि क्या आपको सच में उस महंगे फोन के हाई-एंड फीचर्स की जरूरत है या आप सिर्फ दिखावे और ट्रेंड के दबाव में खरीदारी करने जा रहे हैं। यह भी समझना जरूरी है कि आज ₹50,000 में लिया गया फोन एक साल बाद आधी कीमत का भी नहीं रहेगा, क्योंकि स्मार्टफोन की वैल्यू बहुत तेजी से गिरती है। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आपका मौजूदा फोन वाकई काम करना बंद कर चुका है या सिर्फ नया मॉडल देखकर आपका मन बदल गया है-इन सवालों के जवाब आपको फाइनेंशियली सही फैसला लेने में मदद करेंगे।
2-6-10 रूल फॉलो करने के बड़े फायदे
अगर आप 2-6-10 रूल को अपनाते हैं, तो सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपकी EMI छोटी रहती है और जल्दी खत्म हो जाती है, जिससे लंबे समय तक किस्त भरने का मानसिक तनाव नहीं रहता। इस नियम के चलते आप फोन खरीदने के चक्कर में अपनी मेहनत की सेविंग्स भी खत्म नहीं करते और जरूरी खर्चों के लिए पैसा सुरक्षित रहता है। वहीं, सिर्फ 6 महीने में लोन पूरा चुकाने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत होती है और क्रेडिट स्कोर तेजी से सुधरता है, जो आगे किसी बड़े फाइनेंशियल फैसले में आपके काम आता है।
अगर बजट कम है तो क्या करें?
अगर आपकी पसंद का फोन 2-6-10 रूल में फिट नहीं बैठता, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे स्मार्ट तरीका यह है कि 3–4 महीने तक थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाएं और जब फोन की कम से कम आधी कीमत आपके पास कैश में हो जाए, तब ही उसे खरीदें, इससे EMI का बोझ काफी कम हो जाता है। दूसरा समझदारी भरा विकल्प यह है कि नए मॉडल के लॉन्च होने का इंतजार करें और फिर पुराने मॉडल को चुनें, क्योंकि अक्सर वे 90% वही फीचर्स देते हैं लेकिन कीमत काफी कम हो जाती है।




