नयी दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग ने पूरी दुनिया के आर्थिक परिदृश्य को बहुत तेजी से बदल दिया है और भारत भी इसके असर से अछूता नहीं रहा है। वैश्विक उथलपुथल की यह लहर भारतीय मुद्रा को लेकर डूब रही है। इस जंग के कारण वैश्विक बाजार गिरावट में हैं, जिससे घरेलू शेयर बाजार पर चौतरफा बिकवाली का दबाव हावी है। युद्ध के कारण आपूर्ति संकट की स्थिति ने कच्चे तेल के दाम में तूफानी तेजी लायी है और कच्चे तेल की कीमतों की महंगाई दर तथा भारतीय मुद्रा से सीधा संबंध है। कमोडिटी की ऊंची कीमत भी रुपये पर हावी है। भारतीय मुद्रा पर यह दबाव अगले सप्ताह भी बना रह सकता है। हालांकि अगर केंद्रीय रिजर्व बैंक हस्तक्षेप करे तो रुपये की गिरावट पर नियंत्रण संभव है। आरबीआई अमेरिकी डॉलर को खरीद या बेचकर परिस्थिति के मुताबिक रुपये के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करती है। बीते सप्ताह रुपया 1.15 प्रतिशत लुढ़क कर बंद हुआ है। एडलविज सिक्योरिटीज के फोरेक्स एंड रेट विभाग के प्रमुख सजल गुप्ता ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आये उफान के कारण भारतीय मुद्रा शुक्रवार को 76.18 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई और अगर आरबीआई ने हस्तक्षेप नहीं किया तो अगले सप्ताह इसके 76.80 रुपये प्रति डॉलर के आसपास रहने का अनुमान है। गुप्ता ने कहा कि दुनिया भर में कमोडिटी की बढ़ती कीमत महंगाई को हवा दे रही है और साथ ही बांड यील्ड में तेजी ला रही है। इससे अंतत: मुद्रा कमजोर होती है। शुक्रवार को लंदन का ब्रेंट क्रूड 113.76 डॉलर प्रति बैरल पर रहा जबकि गुरुवार को यह दस साल के उच्चतम स्तर 119.84 डॉलर प्रति बैरल पर था। रूस कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाये गये प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल पर आपूर्ति संकट का खतरा मंडरा रहा है जिससे वैश्विक बाजार में इसके दाम आसमान छूने लगे हैं। विदेशी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आयी तूफानी तेजी का असर डीजल और पेट्रोल की कीमत पर भी पड़ेगा। भारत भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और इसी कारण इसके दाम में तेजी का असर डीजल-पेट्रोल की कीमतों पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक देवर्ष वकील के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वित्तीय घाटा बढ़ने की आशंका भी तेज होती है। मौजूदा स्थिति को देखते हुये आरबीआई को मौद्रिक नीति में बदलाव करके नीतिगत दरों में परिवर्तन कर सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषक गौरांग सौमैय्या के मुताबिक अगले सप्ताह भी सबकी नजर रूस-यूक्रेन पर टिकी होगी क्योंकि इस मामले के और भड़कने से डॉलर और पीली धात में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। –आईएएनएस एकेएस/एएनएम




