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Thursday, March 12, 2026
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CG Election 2023: छत्तीसगढ़ में 20 सीटों पर मतदान आज, किसका पलड़ा भारी ?

CG Election 2023 First Phase Seat: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण का आज मतदान हो रहा। 20 सीटों पर वोटिंग जारी है। इनमें सबसे अहम संभाग बस्तर है। यहां से 90 सीटों में से 12 सीटें आती हैं।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण का आज मतदान हो रहा। 20 सीटों पर वोटिंग जारी है। इनमें सबसे अहम संभाग बस्तर है। यहां से 90 सीटों में से 12 सीटें आती हैं। आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में सात जिले हैं। इनके संभाग में 12 विधानसभा और एक लोकसभा सीट है। बस्तर संभाग की 12 विधानसभा सीटों में 11 विधानसभा सीटें एसटी और एक सीट सामान्य है। इनमें बस्तर, कांकेर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंटा, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर की सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। जगदलपुर विधानसभा सीट सामान्य है। अभी 12 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है।

बस्तर पर कांग्रेस का कब्जा

2018 चुनाव में बीजेपी को यहीं से करारी हार मिली थी। राजनीतिक दृष्टिकोण से बस्तर संभाग काफी अहम है। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी बस्तर संभाग से खुलती है, इसलिए माना जाता है कि छत्तीसगढ़ में सरकार बनानी है तो बस्तर किला पर फतह हासिल करना बहुत जरूरी है। प्रदेश में 90 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 39 सीटें आरक्षित हैं। 39 में से 29 सीटें आदिवासियों के लिए सुरक्षित हैं । 29 में से 12 सीटें बस्तर संभाग से आती हैं। 15 साल तक सत्ता पर काबिज रही बीजेपी को 2018 में यही से करारी शिकस्त मिली थी, इसलिए बीजेपी में सत्ता पाने की बैचेनी है। बस्तर में पीएम मोदी, प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान, जेपी नड्डा, बीजेपी प्रदेश प्रभारी ओपी माथुर समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता दौरा कर चुके हैं। बस्तर संभाग के रहवासियों की मुख्य आय का स्त्रोत वनोपज और खेती-किसानी है।

बस्तर की 12 सीटों का सियासी समीकरण

बस्तर: सीट से बीजेपी प्रत्याशी मनीराम कश्यप के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी लखेश्वर बघेल चुनाव लड़ रहे हैं। वह दो बार के विधायक रहे हैं। 2018 का चुनाव काफी बड़े अंतर से जीते थे। मनीराम पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। वो तीन बार जिला पंचायत सदस्य और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। कुल मतदाता 167635 हैं। इनमें पुरुष 81184 और महिला 86449 हैं। ट्रांसजेंडर 2 हैं।

जगदलपुर: इस बार से बीजेपी प्रत्याशी किरणदेव सिंह के सामने कांग्रेस प्रत्याशी जतिन जायसवाल चुनाव लड़ रहे हैं। वर्तमान में दोनों में कांटे की टक्कर दिख रही। दोनों नगर निगम में पूर्व महापौर रह चुके हैं। किरण पहली बार चुनावी मैदान में हैं। यहां कुल मतदाता 205953 हैं। इनमें पुरुष 98778, महिला 107144 और ट्रांसजेंडर मतदाता 31 हैं।

नारायणपुर: बीजेपी प्रत्याशी केदार कश्यप के सामने कांग्रेस प्रत्याशी चंदन कश्यप चुनाव लड़ रहे हैं। केदार दो बार विधायक और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। अभी भाजपा के महामंत्री हैं। चंदन कश्यप पहली बार के विधायक हैं। उन्होंने 2018 में केदार को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया था। कुल मतदाताओं की संख्या 190672 है। पुरुष 92030, महिला 98639 और ट्रांसजेंडर मतदाता 3 हैं।

कांकेर: बीजेपी प्रत्याशी आशाराम नेताम के सामने कांग्रेस प्रत्याशी शंकर ध्रुव चुनाव लड़ रहे हैं। नेताम पहली बार चुनाव मैदान में है। वे ग्रामीण मंडल मंत्री हैं। शंकर ध्रुव ग्राम पंचायत मुड़पार के सरपंच रह चुके हैं। पहली बार 2013 में विधायक बने। कांग्रेस और बीजेपी में टक्कर दिख रही है। कुल मतदाता 87161 हैं। इनमें पुरुष 87161, महिला 95082 और ट्रांसजेंडर मतदाता 2 हैं।

कोंडागांव: बीजेपी प्रत्याशी लता उसेंडी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी मोहन मरकाम चुनाव लड़ रहे हैं। 2003 से भाजपा की लता उसेंडी विधायक बनीं। 2008 में भी वो दोबारा जीतीं। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मोहन मरकाम ने लता को हराकर विधायकी पर कब्जा कर लिया। 2018 में भी वे दोबारा जीतकर आए। कुल मतदाता 188520 हैं। इनमें पुरुष 91044, महिला 97473 और ट्रांसजेंडर मतदाता 3 हैं।

केशकाल: बीजेपी प्रत्याशी नीलकंठ टेकाम के सामने कांग्रेस प्रत्याशी संतराम नेताम चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व आईएएस ऑफिसर टेकाम पहली बार चुनाव मैदान में हैं। इस सीट से नए चेहरे हैं। संतराम नेताम 2013 में विधायक बने। 17 साल तक पुलिस विभाग में सेवाएं दे चुके हैं। कुल मतदाता 206304 हैं। पुरुष 100230, महिला 106070 और ट्रांसजेंडर मतदाता 4 हैं। क्योंकि बीजेपी प्रत्याशी को चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल चुका है।

दंतेवाड़ा: बीजेपी प्रत्याशी चेतराम अटामी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी छविंद्र महेंद्र कर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। अटामी 2015 से 2020 तक जिला पंचायत सदस्य रहे। दंतेवाड़ा कांग्रेस के दिग्गज नेता महेंद्र कर्मा की परंपरागत सीट रही है। वर्तमान में दंतेवाड़ा सीट से कांग्रेस से देवती कर्मा विधायक हैं। देवती कर्मा बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी हैं, जिन्हें नक्सलियों ने झीरम घाटी में हत्या कर दी थी। इस बार कांग्रेस ने देवती कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा को टिकट दिया है। इस सीट पर हुए 4 चुनावों में तीन बार कांग्रेस की जीत हुई। एक बार बीजेपी की जीत हुई है। कुल मतदाता 192323 है। पुरुष 90084, महिला 102237 और ट्रांसजेंडर मतदाता 2 हैं।

अंतागढ़: बीजेपी प्रत्याशी विक्रम उसेंडी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी रूप सिंह पोटाई चुनाव लड़ रहे हैं। उसेंडी पूर्व सांसद और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। रमन सरकार में 2008 में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। पोटाई सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष और आदिवासी कमेटी जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं। कुल मतदाता 175965 है। पुरुष 88512, महिला 87445 और ट्रांसजेंडर मतदाता 8 हैं।

भानुप्रतापपुर: बीजेपी प्रत्याशी गौतम उईके के सामने कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री मंडावी चुनाव लड़ रहे हैं। उईके पहली बार चुनाव मैदान में हैं। वे 2000 से 2015 तक जनपद सदस्य रह चुके हैं। सावित्री मंडावी पूर्व विधायक मनोज मंडावी की पत्नी हैं। वो उपचुनाव में जीत हासिल की थीं। कुल मतदाता 201826 है। पुरुष 98549, महिला 104275 और ट्रांसजेंडर मतदाता 2 हैं।

कोंटा: बीजेपी प्रत्याशी सोयम मुका के सामने कांग्रेस प्रत्याशी कवासी लखमा चुनाव लड़ रहे हैं। वर्तमान मंत्री और विधायक कवासी लखमा के नाम पांच बार विधायक बनने का रिकॉर्ड है। छठवीं बार चुनाव मैदान में हैं। बस्तर चार बार विधायक बनने वालों में कांग्रेस के झितरूराम बघेल का नाम आता है। उन्हें छोड़ दिया जाए तो अन्य कोई दल प्रत्याशी तीन बार से अधिक चुनाव नहीं जीत सका है। कुल मतदाता 190672 हैं। इनमें पुरुष 92030, महिला 98639 और ट्रांसजेंडर मतदाता 3 हैं।

चित्रकोट: बीजेपी प्रत्याशी विनायक गोयल के सामने कांग्रेस प्रत्याशी दीपक बैज चुनाव लड़ रहे हैं। वो 2013 और 2018 के विधायक हैं। 2019 में पहली बार बस्तर से सांसद बने और वर्तमान में आदिवासी चेहरा होने से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। युवा चेहरे हैं। वहीं गोयल पहली बार विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं। वो तोकापाल मंडल उपाध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। कुल मतदाता 177432 हैं। पुरुष 83471, महिला 93959 और ट्रांसजेंडर मतदाता 2 हैं।

बीजापुर: बीजेपी प्रत्याशी महेश गागड़ा के सामने कांग्रेस प्रत्याशी विक्रम मंडावी चुनाव लड़ रहे हैं। मंडावी पहली बार के विधायक हैं। वर्तमान में वो बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं। वहीं महेश गांगड़ा रमन सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं। अनुसूचित जाति जनजाति के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य हैं। यहां कुल मतदाताओं की संख्या 168991 है। पुरुष 81426, महिला 87557 और ट्रांसजेंडर मतदाता 8 हैं। बीजेपी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर हैं।

बस्तर संभाग में 7 जिले

बस्तर

कांकेर

दंतेवाड़ा

बीजापुर

नारायणपुर

सुकमा

कोंडागांव

बस्तर में 12 विधानसभा सीटें

बस्तर

जगदलपुर

कांकेर

चित्रकोट

दंतेवाड़ा

बीजापुर

कोंटा

केशकाल

कोंडागांव

नारायणपुर

अंतागढ़

भानुप्रतापपुर

11 सीटें एसटी के लिए आरक्षित

केवल 1 सीट जगदलपुर सामान्य

वर्तमान में 12 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा

प्रदेश में 29 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित। 12 सीटें बस्तर संभाग से ही हैं।

बस्तर की वीआईपी सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस के ये प्रत्याशी

नारायणपुर से बीजेपी प्रत्याशी केदार कश्यप के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदन कश्यप

कोंडागांव से बीजेपी प्रत्याशी लता उसेंडी के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी मोहनलाल मरकाम

केशकाल से बीजेपी प्रत्याशी नीलकंठ टेकाम के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी संतराम नेताम

दंतेवाड़ा से बीजेपी प्रत्याशी चेतराम अरामी के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी छविंद्र महेंद्र कर्मा

अंतागढ़ से बीजेपी प्रत्याशी विक्रम उसेंडी के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी रुप सिंह पोटाई

कोंटा से बीजेपी प्रत्याशी सोयम मुका के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी कवासी लखमा

चित्रकोट से बीजेपी प्रत्याशी विनायक गोयल के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी दीपक बैज

बीजापुर से बीजेपी प्रत्याशी महेश गागड़ा के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी विक्रम मंडावी

राजनांदगांव जिले का जातीय समीकरण?

जिले में पिछड़ा वर्ग में साहू समाज की अच्छी खासी आबादी है। यही मतदाता हार जीत का आंकड़ा तय में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक आबादी पिछड़ा वर्ग की है, जिसमें साहू, लोधी, यादव और अन्य शामिल हैं। सामान्य वर्ग की भी आबादी अच्छी खासी है। इससे राजनीतिक पार्टियां ओबीसी फैक्टर को ध्यान में रखकर चुनाव लड़ती हैं। समाज से जुड़े लोगों को देखते हुए रणनीति तैयार करती हैं, जिसका सीधा फायदा प्रत्याशी को मिलता है। राजनांदगांव में अधिकतर आबादी शहरी है। इस कारण शहरी क्षेत्र में पार्टियों का फोकस रहता है। इस सीट में एक बड़ी आबादी ओबीसी की है, इसलिए ओबीसी वोटर्स को साधने का काम राजनीतिक पार्टियां करने में लगी हैं। राजनांदगांव सीट में जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां सामान्य, ओबीसी फैक्टर हावी है। यही जीत तय करते हैं।

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