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Monday, April 6, 2026
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Share Market: जंग के तनाव से शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 365 अंक टूटा, Nifty भी 100 अंक से ज्यादा फिसला

शेयर बाजार में ईरान पर हमलों का साफ असर देखा जा सकता है। कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच आज घरेलू शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत लाल निशान पर हुई।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच BSE Sensex 365 अंकों की गिरावट के साथ 79,658 के स्तर पर खुला। वहीं Nifty 50 भी 100 अंकों से ज्यादा टूटकर करीब 24,656 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में बाजार में दबाव बना रहा और सेंसेक्स करीब 404 अंक तक नीचे गिर गया। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में हल्की तेजी भी देखने को मिली।

कुछ शेयरों में दिखी मजबूती

बाजार में गिरावट के बीच भी कुछ कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे। इनमें Tech Mahindra, Infosys, Reliance Industries, Trent Limited, Sun Pharmaceutical, NTPC, Tata Consultancy Services और Bharat Electronics Limited के शेयर शामिल रहे।

वॉल स्ट्रीट में भी भारी गिरावट

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अमेरिकी शेयर बाजार पर भी पड़ा। गुरुवार को Dow Jones Industrial Average 784 अंक गिरकर 47,954.74 पर बंद हुआ। इसके अलावा S&P 500 0.56 प्रतिशत गिरकर 6,830.71 पर और Nasdaq Composite 0.26 प्रतिशत टूटकर 22,748.99 के स्तर पर बंद हुआ। अमेरिकी बाजार में गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का KOSPI 0.87 प्रतिशत गिर गया। वहीं जापान का Nikkei 225 करीब 0.24 प्रतिशत नीचे आया। इसके अलावा Hang Seng Index में भी गिरावट दर्ज की गई।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

बाजार में गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी एक बड़ा कारण रही। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार 5 मार्च को Foreign Institutional Investors (FII) ने करीब 3,752 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। हालांकि Domestic Institutional Investors (DII) ने 5,153 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा दिया। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz से जुड़े संकट के बीच United States ने भारत को बड़ी राहत दी है। अमेरिका ने भारत को 30 दिनों का अस्थायी लाइसेंस दिया है, जिससे भारतीय रिफाइनरियां Russia से बिना टैरिफ या पेनल्टी के कच्चा तेल खरीद सकेंगी। यह लाइसेंस 5 मार्च 2026 से लागू होगा और इससे भारत को पुराने सस्ते दामों पर तेल मिलने में मदद मिलेगी।

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