नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । राजस्थान और मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इससे लोगों में आक्रोश और डर दोनों का माहौल है। आमतौर पर खांसी-जुकाम में बिना डॉक्टर की सलाह के पैरेंट्स बच्चों को सिरप दे देते हैं, लेकिन अब यही लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है, जिससे लोग दवा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
हाल की घटनाओं के बाद अब पैरेंट्स के मन में डर बैठ गया है कि कफ सिरप बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है। लेकिन सच यह है कि सिर्फ कफ सिरप ही नहीं, बल्कि कई और ओवर-द-काउंटर दवाइयां भी हैं जो बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती हैं, अगर उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के दिया जाए।
इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कौन-सी दवाइयां बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं और जिन्हें देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दरअसल, बड़ों और बच्चों की दवाओं के डोज और असर में बड़ा फर्क होता है। खासकर एस्पिरिन (Aspirin) और एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) जैसी दवाएं बच्चों को बिना विशेषज्ञ सलाह के देना जानलेवा हो सकता है।
बच्चों को एस्पिरिन क्यों नहीं देनी चाहिए?
⦁ एस्पिरिन आमतौर पर सिरदर्द, दांत दर्द, मासिक धर्म के दर्द, सर्दी-जुकाम या बुखार में ली जाती है और इसे एसिटाइलसैलिसिलिक एसिड के नाम से जाना जाता है।
⦁ लेकिन 12 साल से कम उम्र के बच्चों को एस्पिरिन देना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे रेये सिंड्रोम नामक गंभीर और जानलेवा बीमारी हो सकती है। जो लीवर और दिमाग को प्रभावित करती है।
⦁ खासतौर पर अगर बच्चा किसी वायरल इंफेक्शन (जैसे फ्लू या चिकनपॉक्स) से जूझ रहा है, तो एस्पिरिन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों को एस्पिरिन कभी बिना डॉक्टर की सलाह के न दें।
⦁ इसके बजाय बुखार या दर्द में डॉक्टर से पूछकर एसिटामिनोफेन (Paracetamol) या इबुप्रोफेन (Ibuprofen) जैसी दवाएं दी जा सकती हैं।
एसिटामिनोफेन कब नहीं देनी चाहिए?
⦁ एसिटामिनोफेन (Paracetamol) आमतौर पर बुखार या दर्द कम करने के लिए दी जाती है, लेकिन हर स्थिति में यह सुरक्षित नहीं होती।
⦁ 3 महीने से कम उम्र के बच्चों को इसे बिल्कुल नहीं देना चाहिए।
⦁ अगर बच्चे को लिवर से जुड़ी कोई समस्या है, तो यह दवा उसकी स्थिति और बिगाड़ सकती है।
⦁ यदि बच्चा पहले से कोई अन्य ओवर-द-काउंटर (OTC) दवा ले रहा है, तो एसिटामिनोफेन देने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि कई दवाओं में पहले से ही इसका तत्व मौजूद होता है — जिससे ओवरडोज का खतरा बढ़ जाता है।
आइबुप्रोफेन कब नहीं देनी चाहिए?
⦁ 6 महीने से कम उम्र के बच्चों को नहीं देनी चाहिए।
⦁ किसी भी अन्य दवा के साथ आइबुप्रोफेन देने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।
सर्दी की दवा को भी क्यों लेने से बचना चाहिए?
⦁ मिली जानकारी के मुताबिक, 6 साल से छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी या सर्दी की दवा नहीं देनी चाहिए।
⦁ ये दवाएं इस उम्र में आमतौर पर लक्षण कम नहीं करती।
⦁ गलती से ज्यादा खुराक लेने पर हानिकारक हो सकती हैं।
⦁ सर्दी की दवाइयां बच्चों में साइड इफेक्ट्स कर सकती है। जैसे बहुत नींद आना, पेट खराब होना, दाने या एलर्जी हो सकती है।
⦁ इनका काफी गंभीर असर हो सकता है जैसे दिल की धड़कन तेज होना, दौरे या ज्यादा सीरियस मामले में जान भी जा सकती है।
एंटीबायोटिक्स के क्या है साइड इफेक्ट?
एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन में असर करती हैं, लेकिन कई बार लोग गलती से इन्हें वायरल बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम या फ्लू में भी दे देते हैं। जो बिल्कुल गलत है। ऐसा करने से न सिर्फ बच्चे को फायदा नहीं होता, बल्कि उसका शरीर धीरे-धीरे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विकसित कर लेता है।
हर्बल या नेचुरल दवाइयां?
कई लोग यह मानते हैं कि हर्बल या नेचुरल दवाइयां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। बच्चों में ये दवाएं भी एलर्जी, उल्टी, दस्त या स्किन रैश जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। दरअसल, इन दवाओं में मौजूद कुछ जड़ी-बूटियां या तत्व बच्चों के नाजुक शरीर पर तीव्र असर डाल सकते हैं।
माता-पिता को बरतनी चाहिए ये सावधानियां
⦁ बच्चों की दवा हमेशा उम्र और वजन के हिसाब से दें. अपने डॉक्टर से परामर्श लें और उसे फॉलो करें।
⦁ कोई भी दवा देने से पहले लेबल और डोज निर्देश ध्यान से पढ़ें।
⦁ असामान्य लक्षण जैसे तेज बुखार, उल्टी या त्वचा पर रैश होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।





