नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत में एंटीबायोटिक दवाओं का बढ़ता उपयोग अब सुपरबग संकट की ओर इशारा कर रहा है। हाल ही में द लैंसेट में प्रकाशित ग्लोबल स्टडी के अनुसार भारत में अस्पतालों में भर्ती मरीजों में 83% ऐसे रोगाणु पाए गए, जो सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AMR यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध का यह संकट देश के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है।
आसान उपलब्धता और दुरुपयोग बढ़ा रहे खतरे को
डॉक्टरों का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं की आसान उपलब्धता, बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर्स में बिक्री और डेयरी, पोल्ट्री तथा कृषि में दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल इस खतरे को बढ़ा रहा है। भारत के मरीज अन्य देशों की तुलना में अधिक असुरक्षित हैं। स्टडी में अमेरिका में 20%, इटली में 31.5% और नीदरलैंड्स में केवल 10.8% मरीजों में प्रतिरोधी बैक्टीरिया पाए गए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दी चेतावनी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को दिल्ली में राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR 2025-29) की शुरुआत करते हुए कहा कि एएमआर एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गया है। उन्होंने कहा, इस चुनौती का सामना केवल सामूहिक प्रयासों और सभी संबंधित मंत्रालयों की सक्रिय भागीदारी से ही किया जा सकता है।नड्डा ने बताया कि भारत ने इस दिशा में पहल 2010 में शुरू की थी, 2017 में पहला राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च किया गया और अब इसका दूसरा संस्करण लागू किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एएमआर विशेषकर ऑपरेशन, कैंसर और गंभीर स्वास्थ्य मामलों में मरीजों के लिए गंभीर खतरा है।
विशेषज्ञों का डरावना अनुमान
AIG हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की ग्लोबल स्टडी में पाया गया कि भारत में अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज पहले से ही दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया लेकर आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि, अगर एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण नहीं हुआ तो भारत में सुपरबग विस्फोट हो सकता है, जो उपचार को और कठिन बना देगा। विशेषज्ञों ने आम जनता से एंटीबायोटिक दवाओं का केवल डॉक्टर के परामर्श पर सेवन करने और कृषि तथा पशुपालन में इनका उपयोग नियंत्रित करने की अपील की है।




