बुजुर्गों को अकेलापन काफी सालता है। अकेलेपन में अवसाद या निराशा की बीमारी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बुजुर्ग हमेशा उदास, मायूस और अपने में खोए-खोए रहते हैं। उन्हें किसी भी काम में रुचि नहीं लगती है और न ही दैनिक जीवन का वो आनंद उठा पाते हैं। बुजुर्गों में अवसाद के संकेत और लक्षण को समझने और जानने के तीन तरीके हैं- व्यवहार, सोच और अनुभव।
व्यवहार – Behaviours
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- सुस्त पड़ जाना या हमेशा बैचैन रहना
- जबावदेही को इंकार करना और अपने देखभाल पर ध्यान नहीं देना
- परिवार और दोस्तों से कट-कट कर रहना
- कोई भी काम करने की क्षमता में कमी, हमेशा परेशान रहना या गुस्सा में रहना
- किसी भी काम में मन नहीं लगना
- सुबह की चुस्ती-फुर्ती में कठिनाई महसूस करना
- कुछ असंगत और अटपटा सा व्यवहार करना जो चरित्र से मेल नहीं खाता हो
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सोच – Thoughts
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- हिचकिचाहट
- आत्मसम्मान में कमी
- हमेशा मरने की बात करना, जीवन से मोह भंग होना
- नकारात्मक टिप्पणी करना
- आर्थिक स्थिति के लिए ज्यादा चिंता में रहना
- परिवार में अपने हैसियत में हुए बदलाव से नाखुश रहना
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अनुभव – Feelings
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- चिड़चिड़ापन और गुस्सा
- उदासी, खालीपन और लाचार महसूस करना
- हारा हुआ महसूस करना
- अपराध बोध होना
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शारीरिक लक्षण – Physical symptoms
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- सोने की आदत में गड़बड़ी, कभी ज्यादा देर तक सोना तो कभी कम सोना
- हमेशा थके-थके रहना
- चलने-फिरने में धीमापन आना
- सिरदर्द, पीठ दर्द और शरीर में हमेशा दर्द की शिकायत रहना
- याददाश्त में कमी, भूलने की बीमारी
- पाचन क्रिया में गड़बड़ी और हमेशा पेट की बीमारी रहना
- भूख कम लगना और खाने की आदत में बदलाव आना
- वजन अचानक कम हो जाना या बढ़ जाना
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उपर बताए गए लक्षण हो सकता है आप भी महसूस करते हों तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप भी अवसाद की बीमारी से ही ग्रसित है। वैसे ही अगर किसी को डिप्रेशन है तो यह जरुरी नहीं है कि उसे ये सारे लक्षणों का अनुभव होता हो। हो सकता है बूढ़े लोग अपने अवसाद, निराशा या उदासी दूसरे तरीके से भी जताते हों।
अवसाद और पागलपन – Dementia and depression
पागलपन के 5 में से 1 मरीज को अवसाद (Depression) की बीमारी होती है। जब यह दोनों एक साथ हो तो दोनों को पहचानना मुश्किल हो जाता है। दोनों ही बीमारी के इलाज और इलाज के तरीके भी अलग-अलग हैं।
कहां होगा इलाज और किससे मिलेगी मदद – Where to go for treatment and who will help
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- फिजीशियन
- मनोवैज्ञानिक
- मनोचिकित्सक
- मानसिक चिकित्सालय के नर्स
- सामाजिक कार्यकर्ता
- मानसिक चिकित्सा से जुड़े हेल्थ वर्कर
- कांउसलर
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अवसाद के क्या हैं खतरे – What Are Risk Factors for Depression
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- हार्ट स्ट्रोक
- हाइपरटेंशन
- कैंसर
- पुराने दर्द का तेज होना
- मौत का भय
- सामाजिक विलगाव (Social Separation)
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क्या है इलाज – What are the treatments
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- एंटी डिप्रेसेंट गोलियां
- साइकोथेरेपी
- कांउसेलिंग
- इलेक्ट्रोकंक्लुसि थेरेपी
- ब्रेन स्टीमुलेशन थेरेपी
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