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Wednesday, March 11, 2026
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अस्थमा (दमा) – Asthma in Hindi

अस्थमा (दमा) क्या है – What is Asthma in Hindi

सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाने के कारण जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है तब यह स्थिति दमा रोग कहलाती है, इस रोग में व्यक्ति को खांसी की समस्या भी होती है।

अस्थमा (दमा) के लक्षण – Asthma Symptoms in Hindi

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  • जब दमा रोग से पीड़ित रोगी को दौरा पड़ता है तो उसे सूखी या ऐठनदार खांसी होती है।
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  • जब रोग बहुत अधिक बढ़ जाता है तो दौरा आने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे रोगी को सांस लेने में बहुत अधिक दिक्कत आती है तथा व्यक्ति छटपटाने लगता है।
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  • दमा रोग से पीड़ित रोगी को कफ सख्त, बदबूदार तथा डोरीदार निकलता है।
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  • पीड़ित रोगी को सांस लेनें में बहुत अधिक कठिनाई होती है।
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  • यह रोग स्त्री-पुरुष दोनों को हो सकता है।
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  • रात के समय में लगभग 2 बजे के बाद दौरे अधिक पड़ते हैं।
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  • रोगी को रोग के शुरुआती समय में खांसी, सरसराहट और सांस उखड़ने के दौरे पड़ने लगते हैं।
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  • सांस लेते समय अधिक जोर लगाने पर रोगी का चेहरा लाल हो जाता है।
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  • सांस लेते समय हल्की-हल्की सीटी बजने की आवाज भी सुनाई पड़ती है।
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  • सांस लेने तथा सांस को बाहर छोड़ने में काफी जोर लगाना पड़ता है।
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अस्थमा (दमा) के कारण – Asthma Causes in Hindi

अस्थमा कई कारणों से होता है कई बार यह जेनेटिक तो कई बार आनुवांशिक भी हो सकता है। कई अन्य कारण निम्न हैं: 

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  • औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण कफ़ सूख जाने से दमा हो जाता है।
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  • खान-पान के गलत तरीके से यह रोग हो सकता है।
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  • मानसिक तनाव, क्रोध तथा अधिक भय के कारण भी दमा होने का एक कारण है।
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  • खून में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न हो जाने के कारण भी दमा हो सकता है।
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  • नशीले पदार्थों का अधिक सेवन करना भी इस रोग का कारण है।
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  • खांसी, जुकाम तथा नजला रोग अधिक समय तक रहने से दमा हो सकता है।
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  • भूख से अधिक भोजन खाने से दमा हो सकता है।
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  • मिर्च-मसाले, तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा गरिष्ठ भोजन करने से यह रोग हो सकता है।
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  • फेफड़ों में कमजोरी, हृदय में कमजोरी, गुर्दों में कमजोरी, आंतों में कमजोरी, स्नायुमण्डल में कमजोरी तथा नाकड़ा रोग हो जाने के कारण दमा हो जाता है।
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  • मनुष्य की श्वास नलिका में धूल तथा ठंड लग जाने के कारण भी दमा हो सकता है।
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  • धूल के कण, खोपड़ी के खुरण्ड, कुछ पौधों के पुष्परज, अण्डे तथा ऐसे ही अन्य पदार्थों का भोजन में अधिक सेवन करने के कारण यह रोग हो सकता है।
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  • मनुष्य के शरीर की पाचन नलियों में जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का सेवन करने से भी दमा हो सकता है।
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  • मल-मूत्र के वेग को बार-बार रोकने से यह रोग हो सकता है।
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  • गर्द, धुआं, गंदगी, बदबू, गंदे बिस्तर, पुरानी किताबें और कपड़ों की झाड़, खेतों की झाड़, सख्त सर्दी, बरसात, जुकाम, फ्लू, आदि सूक्ष्म कणों का सांस द्वारा फेफड़ों में जाने से दमा हो सकता है।
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  • वातावरण में प्रदूषण से होने वाली एलर्जी
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  • इसके अलावा कई लोगों में कुछ निश्चित दवाओं (एस्पिरीन और बेटा- ब्लॉकर्स) के सेवन से भी दमा के रिस्क फैक्टर्स बढ़ सकते हैं।
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  • अत्यधिक भावनात्मक अभिव्यक्तियां (जैसे चीखने-चिल्लाने या फिर जोरदार तरीके से हंसना भी) भी कुछ लोगों में दमा की समस्या को बढ़ाकर दौरे की स्थिति उत्पन्न कर सकती हैं।
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  • अस्थमा या एलर्जी का पारिवारिक इतिहास (आनिवांशिक दमा)
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  • जन्म के समय कम वजन और समय से पहले बच्चों का जन्म, जन्म के पहले और / या जन्म के बाद तंबाकू के धुएं के संपर्क
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  • भीड़, वायुप्रदूषण, धूल (घर या बाहर की) या पेपर की डस्ट, रसोई का धुआं, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन, सर्दी-जुकाम, धूम्रपान, फास्टफूड्स, तनाव व चिंता, पालतू जानवर के संपर्क में रहना और पेड़-पौधों और फूलों के परागकणों (पौधे के फूलों में पाये जाने वाले सूक्ष्म कणों को परागकण कहते हैं) आदि को शामिल किया जाता है।
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अस्थमा (दमा) का उपचार – Asthma Treatment in Hindi

अस्थमा के रोगी को विपरीत माहौल में बेहद संभल कर रहना चाहिए। मौसम बदलते समय अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ ही कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे: 

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  • रोगी को गर्म बिस्तर पर सोना चाहिए। 
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  • धूम्रपान नहीं करना चाहिए। 
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  • भोजन में मिर्च-मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। 
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  • धूल तथा धुंए भरे वातावरण से बचना चाहिए। 
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  • मानसिक परेशानी, तनाव, क्रोध तथा लड़ाई-झगडों से बचना चाहिए। 
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  • शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। 
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