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माघ मेले में विवाद के बाद नहीं कम हो रहा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का गुस्सा, मारपीट के विरोध में अनशन जारी

मौनी अमावस्या पर प्रशासन और समर्थकों के बीच हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना स्नान किए लौट गए। शंकराचार्य अब मौन व्रत धारण कर धरने पर बैठ गए हैं।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के लिए पालकी में जाने की तैयारी कर रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने रोक दिया, जिससे मेला क्षेत्र में हंगामा मच गया। समर्थकों के विरोध और पुलिस के साथ लगभग तीन घंटे की खींचतान के बाद भी प्रशासन ने उन्हें नहीं छोड़ा। इसके चलते शंकराचार्य बिना स्नान किए लौट गए और त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, जो देर रात तक जारी रहा।

मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर उन्हें मारने की साजिश की थी। उन्होंने कहा कि केवल तभी संगम स्नान करेंगे जब प्रशासन उन्हें सम्मानपूर्वक वहां से ले जाएगा। शंकराचार्य ने यह भी चेतावनी दी कि पिछले कुम्भ में हुई भगदड़ के लिए सरकार जिम्मेदार थी और इसीलिए उन्हें इस बार अपमानित किया गया। उन्होंने मौन व्रत और अनशन भी शुरू किया है, जो अब तक जारी है।

माघ मेले में पालकी से संगम जाने से शंकराचार्य को रोका

दरअसल, जब रविवार सुबह करीब 9:47 बजे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में सवार होकर संगम तट पहुंचे। इस दौरान उनके अनुयायी पैदल चलते रहे थे। तभी प्रशासन ने तट पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया और कहा कि पालकी में बैठकर स्नान नहीं किया जा सकता, केवल पैदल ही आगे बढ़ने की अनुमति है। स्नान स्थल महज 50 मीटर दूर था। अनुयायियों ने रोक को चुनौती दी और धक्का-मुक्की करते हुए संगम वॉच टावर तक पहुंच गए। जब पालकी आगे बढ़ी, तो मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार को आदेश दिया कि भीड़ को देखते हुए इसे आगे न बढ़ने दिया जाए। पुलिस ने शांति बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ गया और कुछ अनुयायियों को संगम चौकी में ले जाकर हिरासत में लिया गया।

संतों से मारपीट का आरोप

शंकराचार्य की पालकी संगम तट से लौट रही थी, लेकिन हंगामे के कारण आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। इस दौरान डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज भी मौके पर पहुंचे और शंकराचार्य से पैदल स्नान के लिए जाने का अनुरोध किया, लेकिन मामला शांत नहीं हो पाया। पुलिस और अनुयायियों के बीच कई बार धक्कामुक्की हुई। विवाद बढ़ने के बाद पुलिस धीरे-धीरे सभी अनुयायियों को संगम चौकी में खींचकर ले आयी। आरोप है कि इस दौरान शंकराचार्य के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि समेत कई संतों के साथ मारपीट की गई, कुछ को बाल पकड़कर खींचा गया। दोपहर करीब 12:15 बजे स्थिति ऐसी हो गई कि शंकराचार्य पालकी में अकेले रह गए, जिसे बाद में कुछ लोगो पालकी को खींचकर ले गए।

“पालकी पर सवार होकर आना परंपरा के विपरीत”

मंडलायुक्त ने बताया कि अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में भारी भीड़ को देखते हुए इसे नो व्हीकल जोन घोषित किया गया था। उनके अनुसार, शंकराचार्य और उनके करीब 200 अनुयायी बिना किसी अनुमति के पालकी पर सवार होकर आए, जो परंपरा के विपरीत था। संगम पर मौजूद करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच बैरियर तोड़कर प्रवेश किया गया और लगभग तीन घंटे तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा। इससे न केवल आम जनता को भारी असुविधा हुई, बल्कि किसी भी समय अप्रिय घटना होने का खतरा भी बढ़ गया।

अक्षयवट मार्ग पर शंकराचार्य अकेले खड़े रहे, छत्र टूटने का आरोप

अक्षयवट मार्ग पर शंकराचार्य की पालकी को रोक दिया गया, इस दौरान छत्र टूटने की घटना सामने आई। छत्र शंकराचार्य के लिए महत्वपूर्ण प्रतीक होने के कारण यह घटना लोगों के बीच आक्रोश का कारण बनी। शंकराचार्य लगभग आधे घंटे तक अकेले खड़े रहे, बाद में उनके समर्थक आए और उन्हें सुरक्षित शिविर तक ले गए। 

हंगामे के दौरान पुलिस आयुक्त ने लाउडस्पीकर के माध्यम से बताया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने पांटून पुल दो के बैरियर को तोड़ दिया। हालांकि, समर्थक इस आरोप से इनकार करते रहे। पुलिस ने इस मामले की पुष्टि के लिए सुबह 9:30 बजे की सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।

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