नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। Malmas 2023: हिंदू धर्म में सावन माह को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने, शिव भक्त पवित्र कांवर लेकर लंबी यात्रा शुरू करते हैं। इस साल सावन का महीना खास है क्योंकि यह 59 दिनों तक चलेगा। मलमास या अधिकमास प्रत्येक 3 साल के बाद पड़ता है। इस बार अधिकमास के कारण सावन 2 महीने तक रहेगा इसके कारण मलमास भी सावन के महीने में ही शुरू हो जाएगा। अधिकमास या मलमास में मांगलिक कार्यक्रम नहीं किये जाते हैं, लेकिन इस मास में पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान दिया जाता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार अधिकमास यानि अधिक मास वर्ष मलमास 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। आइए जानते हैं सावन के महीने में इसका क्या है महत्व है।
Untitled_design.png
सावन में इस मास का महत्व
सावन माह में पड़ने वाले मलमास से भगवान शिव की पूजा करने से दोगुना फल प्राप्त होता है। इससे आपको भगवान शिव को प्रसन्न करने का लाभ पाने के लिए 8 सोमवार मिलते हैं। सावन में मलमास का पड़ना बहुत शुभ माना जाता है। इस बार ऐसा संयोग 19 साल बाद हो रहा है। अधिक मास को मल मास या पुरूषोत्तम मास कहा जाता है। मलमास में विवाह, नित्यकर्म, ग्रह प्रवेश और उपनयन संस्कार जैसे शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं।
इस तरह से होती है मलमास की शुरूआत
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्रांति कहलाता है। सूर्य देव लगभग हर महीने अपनी राशि बदलते हैं। हालाँकि, जब सूर्य की राशि नहीं बदलती है तो उसे मलमास कहा जाता है। इस अवधि में सभी शुभ कार्य जैसे विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन आदि वर्जित माने गए हैं।
अन्य खबरों के लिए क्लिक करें- www.raftaar.in




