नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भोलेनाथ की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि इस साल 26 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान शिव का रूद्राभिषेक कर व्रत रखते हैं। माना जाता है कि इस दिन शिवभक्तों पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बरसती है। महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर के रूप में होती है, इस पूजा विधि के दौरान चार प्रहर में शिवलिंग पर दूध, दही, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित किया जाता है।
महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर के रूप में होती है
महाशिवरात्रि के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है। महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि के दिन 26 फरवरी को सुबह 11:08 बजे से शुरू होगी। ऐसे में उदया तिथि मानने वाले महाशिवरात्रि व्रत 27 फरवरी को रखेंगे, क्योंकि इस दिन महाशिवरात्रि 27 फरवरी को सुबह 08:54 बजे तक है। महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर के रूप में होती है।
चार पहर के पूजा मुहुर्त
पहला पहर – शाम 6 बजकर 18 मिनट से रात 9 बजकर 25 मिनट तक
दूसरा पहरृ – रात 9 बजकर 26 मिनट से शुरू होगा जो 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
तीसरा पहर – 27 फरवरी को रात 12 बजकर 35 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक
चौथा और आखिरी पहर- 27 फरवरी को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से आरंभ होगा और 6 बजकर 4 7मिनट तक रहेगा।
यहां जानिए चार प्रहर की पूजा विधि व मंत्र
प्रथम प्रहर में भगवान शिव के ईशान स्वरूप का दूध से अभिषेक किया जाता है। इसके अलावा इस समय ‘ह्रीं ईशानाय नमः’ नामक मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
द्वितीय प्रहर में भोलेनाथ के अघोर स्वरूप का दही से अभिषेक होता है। इसके अलावा इस दिन ‘ह्रीं अघोराय नम:’ का जाप करना चाहिए।
तृतीय प्रहर में शिव के वामदेव रूप का घी से अभिषेक करें वहीं पर इस मौके पर ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’ का उच्चारण करने से खास फल मिलता है।
चौथे प्रहर में महादेव के सद्योजात स्वरूप का शहद से अभिषेक करें, इस दौरान ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः का जाप करना चाहिए।





