नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व है। साल 2026 में यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि बेहद खास है क्योंकि इस दिन दो ऐसे दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने में सहायक माने जाते हैं।
2 शुभ संयोग: दोगुना फल
1. सर्वार्थ सिद्धि योग
पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी को सुबह 07:00 बजे से शाम 07:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस योग में की गई पूजा, दान और नए कार्य सफल होते हैं। लंबे समय से रुके कार्यों में गति लाने के लिए रुद्राभिषेक करना अत्यंत लाभकारी है।
2. श्रवण नक्षत्र और शिववास
शाम 07:48 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र आरंभ होगा, जिसे शिव साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन शिववास का संयोग भी बन रहा है, जो रुद्राभिषेक और अन्य पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है।
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के पावन दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, मदार के फूल और भस्म अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूरे समय श्रद्धा के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। शाम और निशिता काल में शिव चालीसा का पाठ कर घी के दीपक से महादेव की आरती करें।
महाशिवरात्रि का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन व्रत और पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है और विवाहित महिलाओं का दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह रात्रि जागरण और चेतना के जागरण का महापर्व मानी जाती है। मान्यता है कि इस बार की महाशिवरात्रि दोगुना फल देने वाली है, इसलिए यह भक्तों के लिए अत्यंत शुभ, पुण्यदायी और कल्याणकारी अवसर है।





